पहाड़ में महिलाओं का जीवन पहाड़ जैसा कठिन होता है। पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते-करते कई बार प्राण संकट में आ जाते हैं। कई बार वह पहाड़ी से फिसलकर असमय काल का ग्रास या अपाहिज हो जाती हैं। ऐसा ही हुआ कीर्तिनगर ब्लाक के धौल्याणा गांव की पिंकी के साथ। चार साल जंगल में घास काटते वक्त खाई में गिरने के बाद पिंकी की जान तो बच गई, लेकिन वह बिस्तर से नहीं उठ सकी। माता-पिता की बढ़ती उम्र और आर्थिकी का कोई साधन नहीं होने से दिक्कतें बढ़ रही हैं।
बडियारगढ़ पट्टी के धौल्याणा गांव के प्रेम सिंह नेगी की बेटी पिंकी की शादी आठ वर्ष पहले लोस्तू पट्टी के भरांखील गांव में हुई थी। शादी के करीब चार साल बाद उसकी खुशहाल जिंदगी अचानक बदल गई। जंगल में घास काटते वक्त उसका पांव फिसला और वह लगभग 100 मीटर गहरी में गिर गई। इससे उसकी रीढ़ की हड्डी और शरीर के अन्य अंगों की हड्डियां टूट गई। इलाज के लिए दिल्ली जाया गया। इलाज केे बाद भी गर्दन से नीचे के अंग काम नहीं कर रहे हैं।
प्रेम सिंह दिल्ली में फैक्टरी में काम करते थे। उन्होंने जैसे-तैसे जगह-जगह इलाज करवाया। फायदा नहीं होने पर नौकरी छोड़कर पिंकी को घर ले आए। अब उनकी पत्नी और बहू पिंकी की देखभाल करते हैं। उसको खाना खिलाना, कपड़े बदलना, घावों पर मरहम लगाना और नहलाना-धुलाना उनके जिम्मे हैं। दिक्कत यह है कि चार साल से बिस्तर पर लेटे रहने से उसके शरीर पर घाव हो गए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता हनुमंत भंडारी बताते हैं कि उनको आज तक कोई सरकारी मदद नहीं मिल पाई है। नौकरी भी नहीं रह गई है। आजीविका का कोई साधन नहीं है। एक-दो जनप्रतिनिधि मदद का आश्वासन देकर इलाज संबंधी कागजात भी लिए, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
फैक्टरी मालिक ने की मदद
श्रीनगर। पिंकी का इलाज करवाने में उसके पिता के फैक्टरी मालिक ने काफी सहयोग किया। उन्हीं की बदौलत प्रेम सिंह ने इलाज में लाखों रुपये खर्च किए।
करें मदद
श्रीनगर। यदि आप पिंकी की मदद करना चाहते हैं, तो उनके पिता प्रेम सिंह से मोबाइल फोन नंबर 7895211614 से संपर्क कर सकते हैं।