19 से 23 जनवरी तक रांची में हुई राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पौड़ी जिले से पांच खिलाड़ी भी शामिल हुए। 15 जनवरी को यह खिलाड़ी देहरादून से रांची के लिए रवाना हुए।
खिलाड़ियों ने जाने से लेकर घर वापसी तक की जो व्यथा सुनाई उससे शिक्षा विभाग और शिक्षकों की लापरवाही उजागर हुई है। खिलाड़ियों ने बताया कि जाते समय तीन दिन का ट्रेन का सफर था।
साथ में गई शिक्षिका ने रास्ते में बताया कि खाने के लिए खुद के पैसे खर्च करने पड़ेंगे। अपने साथ पर्याप्त पैसा लेकर आने की खिलाड़ियों को पहले कोई सूचना नहीं दी गई थी।
एक-दो खिलाड़ी ऐसी भी थी जिनके पास पैसे नहीं थे। इनको दूसरे साथियों ने मिलकर खाना खिलाया।
वापसी के समय सोमवार सुबह सात बजे पांच खिलाड़ियों को नजीबाबाद में ट्रेन से उतार दिया गया। किसी के पास किराया और खाने के लिए पैसे हैं या नहीं इस बारे में उनसे पूछा तक नहीं। खिलाड़ियों ने बताया कि किसी तरह से कोटद्वार तक पहुंचे।
इन खिलाड़ियों में कोटद्वार के अलावा नैनीडांडा और जयहरीखाल के खिलाड़ी भी थे। यहां किसी तरह से किराये का इंतजाम करके बस से घर तक पहुंचे। जबकि खिलाड़ियों को घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होती है।
जिस तरह से खिलाड़ियों को नजीबाबाद में छोड़ दिया गया। यदि किसी के साथ कोई अप्रिय घटना घट जाती इसके लिए कौन जिम्मेदार होता।