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Pauri News: मरीजों, छात्रों, कर्मियों को सिजोफ्रेनिया के बारे में दी जानकारी

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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस चिकित्सालय में मनोचिकित्सा विभाग की ओर से विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस मनाया गया। वर्ष 2025 की थीम लेबल पर पुनर्विचार करें: कहानी को पुनः प्राप्त करें पर केंद्रित करते हुए इस दिवस को मनाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य सिजोफ्रेनिया के बारे में जागरूकता बढ़ाना रहा। इस मौके पर जागरूकता प्रपत्र भी वितरित किए गए।

बेस अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग की ओपीडी के पास आयोजित कार्यक्रम में विभाग के एचओडी डॉ. मोहित सैनी ने कहा कि सिजोफ्रेनिया एक पुराना मस्तिष्क विकार है, जो व्यक्ति के विचारों, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करता है। शर्म उपचार में बड़ी बाधा होती है। डॉ. सैनी ने कहा कि इलाज से सिजोफ्रेनिया से पीड़ित कम से कम तीन में से एक व्यक्ति पूरी तरह से ठीक होता है, और बाकि मरीजों में निरंतर उपचार के साथ महत्वपूर्ण सुधार दिखाई देते हैं।
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इस अवसर पर मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. पार्थ दत्ता ने कहा कि सिजोफ्रेनिया के गंभीर मानसिक रोग है, जो हमारे बीच में काफी सारे लोगों में होता है। कहा कि मनोचिकित्सा विभाग में हर दिन ओपीडी में 20-30 प्रतिशत मरीजों में सिजोफ्रेनिया के लक्षण होते हैं, जिनका इलाज विभाग द्वारा किया जा रहा है। कहा सिज़ोफ्रेनिया में कानों में आवाजें सुनाई देना, अलग-अलग तरह के विचार आना, शक-संदेह बनना, अकेले-अकेले में खोये रहना, अन्य से बात न करना, बड़बड़ाना, गुस्सापन, चिड़चिड़ापन, नींद ना आना, भूख न लगना कई लक्षण होते है।
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