राज्य आंदोलनकारी व आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता रविंद्र जुगराण गढ़वाल विवि के छात्र नेताओं के बचाव में खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि जनहित व छात्रहित की बात उठाने वाले छात्रों की आवाज को दबाने के लिए विवि की एक शिक्षिका ने उन्हें औचित्यहीन कानूनी नोटिस थमाकर डराने-धमकाने का प्रयास किया है। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में रविंद्र जुगराण ने कहा कि गढ़वाल विवि में मानकों को ताक पर रखकर भाई-भतीजावाद के आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं, जिसके खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्र नेताओं को डराया-धमकाया जा रहा है। विवि की एक शिक्षिका ने छात्रों को कानूनी नोटिस थमाया है, जबकि इन अनियमितताओं के खिलाफ उच्च न्यायालय में पहले ही जनहित याचिका दायर की जा चुकी है। जुगराण ने गढ़वाल विवि में कुलपति की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुलपति की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुुनौती दी गई है। कहा कि उत्तराखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों में सेवारत शिक्षक लोक सेवा आयोग में सदस्य रहने के बाद अपनी सेवाओं पर वापस आए हैं, जो संविधान का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में भी न्यायालय में चुनौती दी गई है। जुगराण ने कहा कि वह छात्रों के साथ हैं। इस मौके पर बिड़ला परिसर छात्र संघ अध्यक्ष अंकित रावत, बीजीआर परिसर महासचिव गोपाल नेगी, एनएसयूआई प्रदेश सचिव मोहित सिंह, जय हो छात्र संगठन के जिलाध्यक्ष आयुष मिंया आदि मौजूद रहे।