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माधोसिंह भंडारी नृत्य नाटिका मंचन रहा आकर्षण

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श्रीनगर। विकास खंड कीर्तिनगर के मलेथा गांव में वीर शिरोमणि माधोसिंह भंडारी नृत्य नाटक का शानदार मंचन दर्शकों के लिए आकर्षण बना रहा। दिनभर हो रही बूंदाबंदी के बाद दर्शक कड़ाके की ठंड में भी पंडाल में डटे रहे।
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सोमवार को माधोसिंह भंडारी स्मृति मेले के दूसरे दिन का शुभारंभ माता राजराजेश्वरी और गुरु माणिक नाथ की आरती से किया गया। नृत्य नाटिका के पहले दृश्य में तिब्बत के राजा की सेना गढ़वाल पर आक्रमण करती है। जब राजा महिपत शाह को आक्रमण का पता चलता है। राजा बीरभड़ माधोसिंह को अपने दरबार में बुलाता है। इसके बाद माधोसिंह सेना के साथ तिब्बत की ओर कूच करता है। वहां पहुंच कर माधोसिंह और तिब्बती सेना में भारी युद्ध होता है। इसके बाद तिब्बती सेना हार कर भाग जाती है। माधोसिंह भंडारी और सैनिक वहां सीमा बंदी करते हैं। युद्ध में थके माधोसिंह और सैनिक कुछ देर आराम करते हैं। इसी बीच एक सुंदर लड़की माधो सिंह के सपने में आती है। जब माधोसिंह की नींद टूटी तो वह अपने को जंगल में पाता है, लेकिन माधोसिंह सपने में देखी लड़की के काल्पनिक प्यार में खो जाते हैं। संयोग से एक दिन माधोसिंह भंडारी की मुलाकात सपनों में देखी उदीना से हो जाती है और दोनों का विवाह हो जाता है। जब तिब्बत युद्ध जीतने के बाद माधोसिंह भंडारी और सैनिक बारात लेकर राजा महिपत शाह के दरबार पहुंचते हैं। उनका भव्य स्वागत होता है। शादी के काफी दिन बीत जाने के बाद उदीना मधोसिंह भंडारी को ताने सुनाने लगती है कि मलेथा की सुंदर और समतल भूमि बिना पानी के बंजर पड़ी है। माधोसिंह हर दिन ताने सुनकर छेणाधार में जाता है और सोचता रहता कि अलकनंदा नदी किनारे इतनी बड़ी भूमि बंजर पड़ी है, लेकिन सिंचाई के लिए पानी कैसे आएगा। फिर माधोसिंह ने मलेथा के दूसरी ओर बहने वाली चंद्रभागा गाड़ से पानी के बारे में सोचा, लेकिन बीच में छेणाधार की पहाड़ी आड़े आने लगी। माधोसिंह ने इसी पहाड़ी को भेदने का निर्णय लिया। दूसरे दिन माधोसिंह ने छेणाधार की पहाड़ी को खोद कर सुरंग निर्माण का कार्य शुरू किया। काफी समय बाद सुरंग और गूल का निर्माण पूरा हो गया। जब चंद्रभागा गाड़ से गूल पर पानी आगे नहीं बढ़ा तो माधोसिंह थक हार गया। रात को सपने में आई देवी ने माधो सिंह को बताया कि गूल मनुष्य बलि मांग रही है। इसके बाद माधोसिंह ने अपने पुत्र वीर सिंह का बलिदान किया और गूल पर पानी आगे बढ़कर मलेथा की धरती पर पहुंचा। आज भी मलेथा गांव में माधोसिंह भंडारी की स्मृति में मेले का भव्य आयोजन किया जाता है। इस मौके पर मेला समिति अध्यक्ष विजय सिंह रावत, प्रधान अंकित कुमार, पूर्व प्रधान शूरवीर सिंह बिष्ट, संदीप भट्ट, किशन राणा, बॉबी राणा, गीत और संगीतकार सत्यनारायण सेमवाल व प्रवनी राणा आदि मौजूद थे।
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