श्रीनगर। वार्ड संख्या 30 शक्ति विहार से शहीद पार्क के नीचे नदी तट तक जाने वाले मार्ग पर वर्षों पहले बना पारंपरिक स्नान घाट आज भी सिर्फ यादों में बचा है। 2013 की आपदा में यह घाट पूरी तरह बह गया था। इसके बाद नमामि गंगे परियोजना के तहत क्षेत्र में घाटों का निर्माण तो किया गया, लेकिन यहां सिर्फ अन्त्येष्टि स्थल ही विकसित किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर पहले स्नान घाट था, उसकी पूरी तरह उपेक्षा कर दी गई। शक्ति विहार और भक्तियाना के बुजुर्गों व महिलाओं के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता था, जहां वह पर्व-त्योहारों पर गंगा स्नान और पूजा-अर्चना किया करते थे।
पिछले कई वर्षों से स्नान घाट न होने के कारण आम जनमानस को गंगा पूजन और स्नान में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पार्षद वार्ड 30 हिमांशु बहुगुणा ने बताया कि यदि उस पुरानी जगह पर फिर से स्नान घाट का निर्माण कर दिया जाए तो इसे त्रिवेणी घाट की तर्ज पर एक भव्य और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सिंचाई विभाग को औपचारिक पत्र भेज दिया गया है।