राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल में बिन ब्याही युवती के प्रसव के मामले की जांच प्राचार्य प्रो. सीएम रावत स्वयं करेंगे। उन्होंने जांच के लिए कमेटी बना दी है। अस्पताल ने प्रसव के दो घंटे बाद ही युवती का छुट्टी दे दी थी और वह बच्चे को एक कर्मचारी के हवाले कर चली गई थी। बाद में बच्चे की मौत हो गई थी।
नौ जुलाई की शाम चार बजे बेस अस्पताल के प्रसूता वार्ड में 21 वर्षीय गर्भवती अविवाहित युवती को भर्ती कराया गया था। 10 जुलाई को सुबह 11 बजे उसने प्री-मैच्योर (समय से पूर्व) शिशु को जन्म दिया था। प्रसव के दो घंटे बाद ही युवती को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वह बच्चे को एक कर्मचारी के हवाले कर परिजनों के साथ चली गई थी। नियमानुसार प्रसव के बाद मां को कम से कम 48 घंटे भर्ती रखा जाना चाहिए। जाने से पहले युवती से कागज पर यह लिखवा लिया गया कि वह अपनी मर्जी से बच्चे को देकर जा रही है। अविवाहिता के प्रसव की जानकारी अस्पताल प्रशासन को दी जानी चाहिए थी लेकिन प्रसूति विभाग ने ऐसा नहीं किया।
जब सफाई कर्मचारी बच्चे को निकू वार्ड (शिशु गहन देखभाल इकाई) में ले गया तो मामले का खुलासा हुआ। बाल रोग विभाग ने इसकी जानकारी चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बिष्ट को दी। इलाज के दौरान 11 जुलाई को नवजात की मौत हो गई थी। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने मामले की जांच के लिए अपनी अध्यक्षता में कमेटी गठित की है। उन्होंने बताया कि मामला गंभीर है और हर पहलू की जांच की जाएगी। कमेटी में बेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. रविंद्र बिष्ट, वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. पुष्पेंद्र सिंह और प्रो. दीपा हटवाल को सदस्य बनाया गया है।