देवप्रयाग। श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के केंद्रीय पुस्तकालय में साहित्य विद्या शाखा की ओर से प्रकाशित नवीन ग्रंथ राजनीति विमर्श पर एक विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। महाकवि भारवि रचित कालजयी कृति किरातार्जुनीयम् पर आधारित इस ग्रंथ के विमोचन व चर्चा के दौरान विद्वानों ने संस्कृत साहित्य की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
परिसर के निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने कहा कि संस्कृत साहित्य मूलतः नैतिकता प्रधान है। उन्होंने कहा कि आज भी समाज की हर जटिल समस्या का समाधान गीता, रामायण और महाभारत जैसी अमर संस्कृत कृतियों में ही समाहित है। डॉ. एमएन नौडियाल ने इसे एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ की संज्ञा दी। वहीं डॉ. प्रभाकर जोशी ने इस पुस्तक को राजनीति विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। लेखक डॉ. शैलेंद्र नारायण कोटियाल और प्रो. चंद्रकला आर.कोण्डी ने बताया कि इस ग्रंथ की विषयवस्तु में मुख्य रूप से राजनीतिक व्यवहार और कूटनीतिक चर्चाओं को केंद्र में रखा गया है। संचालन डॉ. नवीन डोबरियाल ने किया। डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सुशील बडोनी आदि मौजूद रहे। संवाद