श्रीनगर। अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी द्वारा निर्मित फिश हैचरी का संचालन अब गढ़वाल विश्वविद्यालय का जंतु विज्ञान विभाग करेगा। अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी ने फिश हैचरी को गढ़वाल विवि को हस्तांतरण कर दिया है। फिश हैचरी में महासीर मछली (टॉर प्यूटिटोरा) का पालन किया जा रहा है, जो कि उत्तराखंड की राज्य मछली का दर्जा प्राप्त है। आईयूसीएन ने भी इस मछली को विश्व स्तर पर एक संकटग्रस्त प्रजाति घोषित किया है।
यह मछली मैदानी इलाकों की नदियों एवं जलधाराओं से पहाड़ों की जलधाराओं में प्रजनन के लिए हर वर्ष आती है। पहाड़ी क्षेत्र की नदियों में इस प्रजाति की संख्या को बढ़ाने के लिए गढ़वाल विवि का जंतु विज्ञान विभाग शोध कार्य कर रहा है। अलकनंदा हाइड्रोपावर कंपनी ने वर्ष 2015 में फिश हैचरी का निर्माण कराया था, एवं इसका रखरखाव भी कंपनी के सहयोग से किया जा रहा था।
सोमवार को गढ़वाल विवि के चौरास स्थित जंतु विज्ञान विभाग में आयोजित बैठक में अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी द्वारा निर्मित फिश हैचरी को जंतु विज्ञान विभाग को हस्तान्तरित किया गया। अब इसका प्रबंधन विश्वविद्यालय द्वारा ही किया जाएगा। बैठक में अलकनंदा हाइड्रोपावर कंपनी की ओर से कंपनी के महाप्रबंधक (मानव संसाधन) अरुण कुमार सिंह एवं जंतु विज्ञान विभाग के (प्रभारी) विभागाध्यक्ष प्रो. मंजु प्रकाश गुसाईं, प्रो. ओम प्रकाश गुसाईं, प्रो. दीपक सिंह, संयोजक फिश हैचरी प्रो. आरएस फर्त्याल, विजयानन्द बहुगुणा, डॉ. आनन्द कुमार, डॉ. जितेन्द्र सिंह राणा, अजय भूषण आदि मौजूद रहे।