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यहां गंगा ठहरी है और पत्थरों में रवानी है...

Sun, 29 Nov 2015 09:41 PM IST
श्रीनगर
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बैकुंठ चतुर्दशी मेले में कवियों ने समाज में बढ़ती विसंगतियों, राजनीति व भ्रष्टाचार पर कड़े प्रहार किए। कवि डॉ. हरिओम पंवार ने श्रोताओं के ह्दय में राष्ट्रप्रेम के बीज बोए। श्रीनगर के कवि सम्मेलन में अलीगढ़ से पहुंची शायरा मुमताज नसीम ने मां सरस्वती की वंदना कर सहिष्णुता का संदेश दिया।
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शनिवार रात बैकुंठ चतुर्दशी मेले में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का उद्घाटन जिलाधिकारी चंद्रशेखर भट्ट व राज्यमंत्री भूपेंद्र लिंगवाल ने किया। सम्मेलन का आगाज शहर के कवि जयकृष्ण पैन्यूली ने सरकार पर तंज करते हुए कहा कि जो बुनियादी मुद्दे हैं, उन्हें आसमान तक उछलने दो। बहुत चल चुका देश फाइलों में अब जमीन पर चलने दो। अलकनंदा के रोके गए पानी पर तंज कसते हुए पैन्यूली ने कहा कि हलक में प्यास है, और सर तक पानी है। जुबान बूढ़ी हो चली, सवालों में जवानी है। खुदा तेरी तो यहां तस्वीर ही बदल डाली, गंगा यहां ठहरी है और पत्थरों में रवानी है।

दीपक गुप्ता ने जीवन कैसे भी जियो, लेकिन हद में रहने का संदेश इस तरह दिया कि भले ही हम मद रहते हैं, मगर हम हद में रहते है। हमारी उन से बनती है, जो अपने कद में रहते हैं। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कवि नीरज नैथानी ने कूड़ा बीनने वाले बच्चों की व्यथा को इन पंक्तियों के साथ रेखांकित किया कि दिनभर गली-शहर भटक कर, कूड़े के ढेरों को चुनकर। बचपन यूं ही पल जाता है, जीवन यू हीं चल जाता है। हास्य कवि अरुण जैमिनी ने तरह-तरह के चुटकुले सुना श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। शायरा मुमताज नसीम ने युवाओं के दिलों मेें प्रेम के बीच रोपते हुए कहा कि आज इकरार कर लिया हमने, खुद को बीमार कर लिया हमने। लगता है अब जान ही जाएगी, तुमसे जो प्यार कर लिया हमने पर जमकर वाहवाही लूटी। पंडित सुरेश नीरव ने राष्ट्र में गिरते नैतिक मूल्यों पर प्रहार करते हुए कहा कि खेल नंगे पन का पूरी शान पर है, देश का अब पतन उत्थान पर है।
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मैं भारत का संविधान, लाल किले से बोल रहा हूं
डॉ. कुंवर बैचेन ने कहा कि किसी भी काम को करने की चाह पहले आती है। बच्चे को गोदी में लो तो, पहले बांहें आती हैं, सुनाकर जीवन में आशावादी बने रहने का संदेश दिया। डॉ. हरिओम पंवार ने कवि सम्मेलन में देश प्रेम से पल्लवित कविताएं सुना युवाओं में नया जोश भर दिया। उनकी कविताएं सुन तालियाें की गड़गड़ाहट रुकने का नाम नहीं ले रही थी। उन्होंने देश के संविधान पर कहा कि मैं भारत का संविधान हूं, लाल किले से बोल रहा हूं। मेरा अंतर मन घायल है, दिल की गांठे खोल रहा हूं। सुना संविधान से हो रही छेड़छाड़ व बयानबाजी को चरितार्थ किया। सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. हरिओम पंवार व संचालन पंडित सुरेश नीरव ने किया। इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष बिपिन मैठानी, सभासद गणेश भट्ट, विजय लक्ष्मी रतूड़ी, रामेश्वरी देवी, परवेज अहमद, हीरा लाल जैन आदि मौजूद थे।
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