गढ़वाल विश्वविद्यालय में गंगा गाइड प्रशिक्षण की शुरुआत की गई। इस मौके पर उन्होंने गंगा को स्वच्छ रखने और गंगा क्षेत्र की आध्यात्मिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व पर्यारणीय संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बताया।विशिष्ट अतिथि मैती आंदोलन के प्रणेता पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि गंगा का आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, धार्मिक के साथ-साथ प्राकृतिक महत्व भी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रति कुलपति प्रो. आरसी भट्ट ने गंगा के प्राचीन महत्व को रेखांकित किया।दूसरे सत्र में प्रो. मोहन सिंह पंवार ने प्रशिणार्थियों का ध्यान गंगा के पर्यावरण तथा हिमालय की वर्तमान भौगोलिक समस्याओं की ओर खींचा।
गढ़वाल विश्वविद्यालय में गंगा गाइड प्रशिक्षण की शुरुआत की गई। एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी मिशन ऑफ एवरेसेस ऑन नमामि गंगे (उमंग) ने कार्यक्रम आयोजन किया।
विज्ञापन
सोमवार को गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित शैक्षणिक क्रियाकलाप केंद्र में कार्यक्रम कराया गया। शुरुआत भारत सरकार के गंगा स्वच्छता मिशन सलाहकार जगमोहन गुप्ता ने की। इस मौके पर उन्होंने गंगा को स्वच्छ रखने और गंगा क्षेत्र की आध्यात्मिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व पर्यारणीय संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बताया।
विशिष्ट अतिथि मैती आंदोलन के प्रणेता पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि गंगा का आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, धार्मिक के साथ-साथ प्राकृतिक महत्व भी है। बुग्यालों की जड़ी बूटियों से ही गंगा का स्वरूप अमृत रूप है। उन्होंने गंगा के शीर्ष पर स्थित बुग्यालों की जैव विविधता को बचाने के प्रयास करने पर बल दिया।
विज्ञापन
चौरास परिसर के निदेशक प्रो. सीएम शर्मा ने गंगा के भौगोलिक और भूगर्भीय संबंधों विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रति कुलपति प्रो. आरसी भट्ट ने गंगा के प्राचीन महत्व को रेखांकित किया।
दूसरे सत्र में प्रो. मोहन सिंह पंवार ने प्रशिणार्थियों का ध्यान गंगा के पर्यावरण तथा हिमालय की वर्तमान भौगोलिक समस्याओं की ओर खींचा। इस अवसर पर गणेश कुकसाल, पौड़ी परिसर निदेशक डॉ. प्रभाकर बडोनी, डॉ. सर्वेश उनियाल और गजेंद्र रमोला, मंच संचालक डॉ. राकेश ड्योढ़ी मौजूद रहे।