श्रीनगर। दीपावली के पर्व पर आतिशबाजी से होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल में पांच बेड की बर्न यूनिट स्थापित की गई है। साथ ही डॉक्टरों व सर्जिकल टीम को तैनात किया गया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, आपातकालीन स्थिति में जलने से घायल मरीजों को तुरंत और सुरक्षित माहौल में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है। हालांकि, अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते गंभीर मामलों में मरीजों को उच्च स्वास्थ्य केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक व नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. एएन पांडेय ने बताया कि दीपावली को देखते हुए अस्पताल में विशेष सतर्कता रखी गई है। उन्होंने त्योहार के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से आंखों को बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि जरा सी लापरवाही से आंखों को गंभीर नुकसान और केमिकल इंजरी हो सकती है।
विशेष सावधानियां और बचाव के उपाय
आंखों की सुरक्षा: पटाखे जलाते समय विशेष चश्मा (ग्लॉस) पहनें ताकि चिंगारी और धुएं से आंखें सुरक्षित रहें।
बच्चों को रखें दूर: बच्चों को पटाखों से सुरक्षित दूरी पर रखें और उनकी निगरानी करें।
ध्वनि प्रदूषण से बचाव: अत्यधिक तेज आवाज वाले पटाखों से बचें, जो कान और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
प्राथमिक उपचार: यदि कोई केमिकल इंजरी या जलने की घटना हो जाए, तो तुरंत साफ पानी से घाव या प्रभावित हिस्से को धुलें और तुरंत अस्पताल पहुंचें।