नदी का पारिस्थितिकी तंत्र हो रहा गड़बड़
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। नगर क्षेत्र में अलकनंदा नदी में बड़ी मात्रा में मछलियों का अवैध शिकार हो रहा है। इसके बावजूद प्रशासन एवं वन विभाग लापरवाह बना हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे नदी का पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
अलकनंदा नदी में स्नो ट्राउट मछलियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। शिकार किए जाने से संकटग्रस्त श्रेणी की महाशीर मछली काफी कम संख्या में नदी में रह गई हैं। यहां श्रीनगर परियोजना के बांध से पानी रोके जाने के दौरान पॉवर हाउस के समीप व अन्य स्थानों पर जलस्तर में कमी होने पर मछलियों के अवैध शिकार के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच जाते हैं।
सोशल मीडिया पर यह मामला वायरल होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अलकनंदा नदी में लगातार स्नो ट्राउट मछलियों की प्रजाति में कमी आती जा रही है। साथ महाशीर अब संकटग्रस्त श्रेणी में आ गई है।
गढ़वाल विवि के प्रो. दीपक भंडारी का कहना है कि अलकनंदा नदी में पूर्व की तरह अब मछलियां नहीं दिखती हैं। इनके आवास क्षेत्र का गड़बड़ा जाना व अत्यधिक दोहन इसका कारण माना जा रहा है। इससे नदी में मछलियों पर निर्भर पक्षी व ऊदबिलाव भी गायब होते जा रहे हैं। नवनियुक्त वन क्षेत्राधिकारी नक्षत्र शाह ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। मछलियों के अवैध शिकार करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।