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Pauri News: विशेषज्ञों ने सगंध व औषधीय पादपों की खेती करने पर दिया जोर

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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती, मूल्य संवर्धन एवं बाजार एकीकरण विषय पर दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में गढ़वाल क्षेत्र के 100 से अधिक काश्तकारों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों ने सगंध व औषधीय पादपों की खेती करने पर जोर दिया।

बृहस्पतिवार को गढ़वाल विवि के हैप्रेक संस्थान में क्षेत्रीय सह सुविधा केंद्र, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, आयुष मंत्रालय, जोगिंदर नगर, हिमाचल प्रदेश व औद्योगिकी संगठन के संयुक्त प्रयारों से कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला में गढ़वाल के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे किसानों को जड़ी-बूटियों की खेती, बाजार एकीकरण से लेकर सगंध पौधों की खेती को लेकर जागरूक किया गया।
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बतौर मुख्य अतिथि औद्यानिकी एवं वानिकी विवि (भरसार) के उद्यान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. एके जोशी ने कहा कि तेजी के साथ खेत बंजर हो रही भूमि पर सगंध या औषधीय पौधे लगाकर भूमि को हरा भरा करने के साथ आजीविका भी सृजित हो सकती है। विशिष्ट अतिथि जिला उद्यान अधिकारी राजेश तिवारी ने सरकार की ओर से संचालित योजनाओं के बारे में बताया। कहा कि विभाग की ओर से किसानों के लिए तमाम योजनाएं तो चलाई जा रहीं है, लेकिन काश्तकार दिलचस्पी नहीं ले रहा है।
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बताया कि कलस्टर पॉलीहाउस योजना के तहत भी किसानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। वर्चुअल माध्यम से जुड़े आरसीएफसी एनएमपीबी, आयुष मंत्रालय, जोगिंदर नगर, हिमाचल प्रदेश के निदेशक डाॅ. अरुण चंदन ने कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड दोनों ही जड़ी-बूटी के कृषिकरण व संरक्षण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कहा कि यहां उगने वाले औषधीय पौधे पूरे विश्व में कहीं नहीं पाए जाते। हैप्रेक निदेशक डा. विजयकांत पुरोहित ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर प्रो. जेएस चौहान, प्रो. एमसी सती, एनके गुप्ता, डॉ बबीता पाटनी, आरसीएफसी से मिनाक्षी, अविका शुभा, डाॅ. विजयलक्ष्मी, डाॅ. जेएस बुटोला, डाॅ. टीएस बिष्ट, डाॅ. लक्ष्मण कंडारी, डाॅ. सुदीप सेमवाल सहित आदि मौजूद रहे।
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