विद्युत वितरण खंड कोटद्वार के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार मिश्रा को मात्र 14 महीने के कार्यकाल में ही विदा होना पड़ा। उनकी इतनी जल्दी विदाई के पीछे चर्चा है कि वे सफेदपोश बिजली चोरों की आंखों की किरकिरी बने हुए थे।
अपने 14 महीने के कार्यकाल में मिश्रा के खाते में कई उपलब्धियां जोड़ी जा रही हैं। इनमें लाइन लॉस कम करने, धड़ाधड़ बिजली चोरी पकड़कर ऊर्जा निगम को 50 लाख से अधिक का राजस्व दिलाने, स्टाफ की कमी के बावजूद पूरे खंड में बिजली आपूर्ति व्यवस्थाओं में सुधार के लिए चर्चित रहे हैं।
चर्चा है कि एके मिश्रा को सत्तारूढ़ दल ने यहां से रुड़की ट्रांसफर करवा दिया। उनकी जगह रुड़की से आए अधिशासी अभियंता अनिल वर्मा ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। एके मिश्रा ने 25 अगस्त, 2014 को कोटद्वार के अधिशासी अभियंता का कार्यभार ग्रहण किया था। शहर के आमपड़ाव, लकड़ीपड़ाव, बालासौड़, गोविंदनगर समेत कोई इलाका ऐसा नहीं रहा, जहां उन्होंने वर्षों से हो रही बिजली चोरी पर लगाम कसी। बिजली चोरी के धड़ाधड़ मुकदमे भी दर्ज हुए।
शहर के कई सफेदपोश लोगों के रेस्टोरेंट और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में वर्षों से हो रही चोरी पर वसूली गई लाखों रुपये की पेनाल्टी भी सरकारी खजाने में आई। बिजली चोरी पर अंकुश लगने से जहां उन्हें एक ओर सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कोपभाजन होना पड़ा, वहीं कालागढ़ समेत कई इलाकों में मीटर बाहर लगाने के आदेश भी उन पर भारी पड़े। सूत्रों की मानें तो सत्तारूढ़ दल से जुड़े एक तबके ने उन्हें हटाने के लिए एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया।
उनसे पहले यहां तैनात रहे कई अधिकारी यहां जेई से लेकर एसडीओ और वर्षों तक ईई बने रहे। उनके कार्यकाल में बिजली चोरी के मामलों में इतनी कार्रवाई नहीं हुई, जितनी अकेले 14 महीने में हुई।