पेयजल निगम दफ्तर में हंगामे के बाद शुक्रवार को अधिशासी अभियंता (ईई) और ठेकेदार ने एक दूसरे के खिलाफ तहरीर दी है। ईई का कहना है कि काम में तकनीकी खामी की वजह से भुगतान नहीं किया जा सकता है जबकि ठेकेदार का कहना है कि विभाग भुगतान के लिए चक्कर कटवा रहा है।
पेयजल निगम की ओर से ब्लॉक पाबौ के बिडोली गांव में 23.88 लाख की लागत से सोलर पंपिंग पेयजल योजना का निर्माण करवाया गया है। इसका ठेका पौड़ी के सुनील जोशी को दिया गया है। बृहस्पतिवार को जोशी योजना के भुगतान के संबंध में ईई आरसी मिश्रा से मिलने आए। इसी दौरान दोनों में बहस हो गई। इसके बाद ईई ने अपने कक्ष से बाहर निकलकर ठेकेदार को बंद कर दिया। इस प्रकरण में ईई मिश्रा ने कोतवाली में शिकायत करते हुए बताया कि ठेकेदार भुगतान के लिए दबाव बनाने के लिए अभद्रता कर रहा था। उसने भुगतान न होने पर आत्मदाह की धमकी दी थी जबकि तकनीकी रूप से काम में खामी होने की वजह से भुगतान नहीं किया जा सकता। उसकी धमकी की वजह से कमरे में बैठाकर पुलिस को फोन किया गया। उन्होंने बताया कि ठेकेदार की ओर से दिया गया चेक भी बाउंस हो गया। उन्होंने ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। वहीं ठेकेदार जोशी ने भी ईई के खिलाफ तहरीर देते हुए बताया कि उसने छह माह पूर्व काम पूरा कर दिया है लेकिन निगम भुगतान नहीं कर रहा था। विभाग ने कई बार चक्कर कटवा दिए। बृहस्पतिवार को ईई ने भुगतान करने के बजाय उसे कमरे में बंद कर दिया। वहीं कोतवाल हरिओम राज चौहान के अनुसार मामले में ईई और ठेकेदार ने एक दूसरे के खिलाफ तहरीर दी है। जांच के बाद मुकदमे की कार्रवाई की जाएगी।
ठेकेदार ने डीएम से की ईई के खिलाफ कार्रवाई की मांग
पौड़ी। जल निगम श्रीनगर के अधिशासी अभियंता पर एक ठेकेदार ने कमरे में बंद कर मारपीट व गाली-गलौज करने का आरोप लगाया है। ठेकेदार ने डीएम से मामले की शिकायत कर ईई के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। जल निगम के श्रीनगर कार्यालय में बीते बृहस्पतिवार को निर्माण कार्य के भुगतान को लेकर विवाद सामने आया था। वहीं विभागीय अधिकारियों ने ठेकेदार के खिलाफ कोतवाली श्रीनगर में सरकारी कामकाज में बाधा की शिकायत दर्ज कराई है।
कंडोलिया रोड निवासी ठेकेदार सुनील चंद्र जोशी ने डीएम को ज्ञापन सौंपा। ठेकेदार जोशी ने जल निगम श्रीनगर के ईई के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं जल निगम श्रीनगर के अधिशासी अभियंता आरसी मिश्रा ने बताया कि निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पर गुणवत्ता खराब मिली थी। कार्यालय में विवाद के कारण कोई अनहोनी घटना न हो इसलिए ठेकेदार की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें कमरे में बंद कर सूचना पुलिस को दी गई थी।