उत्तराखंड के लिए पर्यावरण पूरक निवेश एवं रोजगार विषय पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का शुभारंभ किया गया है। वेबिनार में भारत सरकार के पूर्व सचिव डा. कमल टावरी ने जर्मनी से अपने संबोधन में कहा कि देश में बढ़ती जनसंख्या के लिए रोजगार बड़ी चुनौती है, जिसे हल करने की जिम्मेदारी सरकार और समाज दोनों की है। इस दौरान बताया गया कि रोजगार के अवसरों पर चर्चा के बाद ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
शनिवार को अतिरिक्त सोच एवं कार्य नियोजन आयोग व पर्वतीय विकास शोध केंद्र एवं हिमालय बचाओ आंदोलन की ओर से ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें भारत सरकार के पूर्व सचिव डा. कमल ने कहा कि शिक्षित व अल्प शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए इस वेबिनार में पर्यावरण पूरक व्यवसाय की संभावनाओं पर चर्चा कर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय चिंतक विश्व जागृति मिशन आनंद धाम के निदेशक राम महेश मिश्र ने कहा कि आज का युवा रोल मॉडल की तलाश कर रहा है। अब कोरोनाकाल में उसे अपना रोजगार चुनना होगा। कहा कि उत्तराखंड में जैविक खेती ही एक लाभप्रद रोजगार है। हिमालय ऐडवेंचर के निदेशक एसपी चमोली ने जनपद उत्तरकाशी के रवाई क्षेत्र का हवाला देते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में उद्यानीकरण और व्यवसायिक खेती अधिक लाभकारी है। वेबिनार के संयोजक डा. अरविंद दरमोड़ा और समीर रतूड़ी ने बताया कि वेबिनार में ऐसे बुजुर्गोँ को आमंत्रित किया गया है, जिन्होंने बिना अनुदान के अपनी आजीविका के साथ दूसरों को भी रोजगार दिया है। कार्यशाला में ह्यूमन इंडिया के निदेशक डा. जितेंद्र बुटोला, मोनिका पंवार, अवतार सिंह नेगी, द्वारिका प्रसाद सेमवाल, पूर्व मंत्री डा. मोहन सिंह रावत गांववासी, प्रो. मोहन सिंह पंवार, सुनील टावरी, केशव गुरूमुखी, डा. स्वामी रामेश्वर, मदन मोहन गुप्ता आदि ने अपने विचार रखे।