श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के यूजीसी-एमएमटीटीसी केंद्र में 20 जुलाई से 1 अगस्त तक ‘भारतीय भाषाओं की समरसता एवं बहुलता का स्वरूप’ विषय पर आयोजित पुनश्चर्या कार्यक्रम संपन्न हो गया। इसमें देश भर से आए 60 शिक्षकों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. सुधीर कुमार सिंह ने नई शिक्षा नीति-2020 के तहत ऐसे आयोजनों को शिक्षकों के अकादमिक विकास के लिए अहम बताया। दिल्ली विवि के प्रो. दर्शन पांडे, कुमाऊं विवि की प्रो. चंद्रकला रावत और जेएनयू के प्रो. सुधीर प्रताप सिंह ने भारतीय साहित्य, सांस्कृतिक चेतना, उत्तराखंड की भाषाई विविधता और भाषाओं के संरक्षण पर जोर दिया। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. गुड्डी बिष्ट पंवार ने प्रतिभागियों को नई समझ मिलने की बात कही। संकायाध्यक्ष प्रो. डीएस कैंतुरा की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में केंद्र के निदेशक प्रो. डीएस नेगी, डॉ. सोमेश थपलियाल, डॉ. कविता भट्ट और डॉ. राहुल कुंवर सिंह आदि मौजूद रहे।