डालियों का दगड़या (डीकेडी) और हिमाद समिति चमोली की ओर से परियोजना कर्मियों की कार्यशाला शुरू हुई जिसमें जलवायु परिवर्तन और सामुदायिक भागीदारी पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी।
सोमवार से गढ़वाल विवि के चौरास स्थित शैक्षिक क्रियाकलाप केंद्र में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हुई। मुख्य अतिथि भूविज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. आरएस राणा ने कहा कि हिमालय युवा पर्वत है। इसलिए जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ जैसे स्थितियां सबसे ज्यादा देखने को मिलती है।
मुख्य वक्ता पर्यावरण विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. आरके मैखुरी ने कहा कि पिछले 20 सालों में देखने को मिला है कि उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और आयवृद्धि विकास में बहुत तेजी से कमी आ रही है। उन्होंने किसानों को जलवायु समानुकूलन खेती के लिए अरबी, हल्दी और अदरक जैसी व्यापारिक फसलों को उगाने की सलाह दी।
डीकेडी के निदेशक व भूगोल विभाग के प्रो. मोहन पंवार ने बताया कि आज ग्लेशियर पिघलने के कारण 10-12 मीटर पीछे की ओर खिसक गए हैं। पृथ्वी पर 97 प्रतिशत खारा पानी है जो कि पीने लायक नहीं है। पीने लायक पानी तीन प्रतिशत है। इसमें भी 2.3 प्रतिशत ठोस के रूप और 0.7 प्रतिशत तरल रूप में है। हिमाद समिति के निदेशक डॉ. डीएस पुंडीर ने परियोजना में होने वाली गतिविधियों जल संरक्षण, युवा मंडलों व महिला समूहों के गठन की जानकारी दी।