उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि देहरादून प्रदेश की राजधानी का बोझ सहने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा देहरादून को राजधानी बनाया गया लेकिन शहर स्थिति दिनोंदिन बढ़ रही भीड़ से बदहाल हो रही है।
पत्रकार वार्ता में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि गैरसैंण उत्तराखंड की मूल अवधारणा है। जब हम गैरसैंण की बात करते हैं तो पूरे पहाड़ की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि पौड़ी राज्य आंदोलन की धुरी रहा है। पहाड़ में महिलाओं की पीड़ा का समझते हुए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री घस्यारी योजना शुरू की। महिलाओं को पति की पैतृक संपत्ति में अधिकार दिया। गैरसैंण को अभी ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है।
पूर्व सीएम ने कहा कि ल्वाली झील का डिजाइन त्रुटिपूर्ण रहा है। परिकल्पना के अनुरूप झील साकार रूप नहीं ले पाई है। डीएम को स्थानीय लोगों से बातचीत कर और भूमि अधिगृहित कर झील को वृहत रूप दिया जाए। उत्तरकाशी के जादुंग गांव के लोगों के पुनर्वास का प्रयास किया जा रहा है। चमोली जिले के बाड़ाहोती में केरल की महिला डौक्टर, रिमखिम में झारखंड की महिला डॉक्टर अकेली सेवाएं दे रही हैं लेकिन हम सुविधाएं खोजते हैं। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच व कार्ययोजना से चीड़ उत्तराखंड के विकास का पर्याय बनेगा। पिरुल से पेलेट्स बनाने की कार्ययोजना कुछ दिनों पूर्व रखी थी जिसको लेकर प्रधानमंत्री बहुत उत्साहित हैं।
कर्णप्रयाग में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सिवाई में बन रहे ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन स्टेशन के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। वे परियोजना का निर्माण कर रहे कंपनी के अधिकारियों के साथ सुरंग के अंदर भी गए। उन्होंने कहा कि रेल परियोजना का निर्माण होने से राज्य में पर्यटन की दिशा में नए आयाम स्थापित होंगे। रेल से लोग देहरादून और ऋषिकेश भी लोग जल्दी पहुंच पाएंगे।