घुड़दौड़ी में मीडिया से बातचीत में वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने कहा कि गुलदारों की गणना करना उत्तराखंड में संभव नहीं है। कहा कि बाघ, हाथी, हिम तेंदुआ आदि नियत क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जिनकी गणना के लिए ट्रेप कैमरे की सहायता के अलावा अन्य संसाधनों का उपयोग किया जाता है। इसलिए इनकी गणना संभव है। वन मंत्री ने कहा कि सरकार मानव व वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के ठोस प्रयास कर रही है। कहा कि प्रदेश सरकार ने मानव व वन्यजीव संघर्ष को पहली बार आपदा की श्रेणी में रखा है। अब जंगली जानवर के हमले से पीड़ित को आपदा नियमों के तहत मुआवजा दिया जा रहा है। बताया कि प्रदेश में वन्यजीव व मानव संघर्ष को कम करने के लिए सात हजार वन वाचक तैनात किए जाएंगे। जो जन जागरूकता अभियान भी चलाएंगे। इसके अलावा उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार बंदरबाड़े बनाए जा रहे हैं। 19 करोड़ की लागत से एक बंदरवाड़ा गढ़वाल व एक कुमाऊं क्षेत्र में बनाया जाएगा। वहीं प्रदेश मेें नेतृत्व परिवर्तन के सवाल पर वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने इसे मीडिया का मसाला करार दिया। इस अवसर जिला महामंत्री भाजपा जगत किशोर बड़त्वाल, नगर अध्यक्ष क्रांति किशोर नेगी, महावीर नेगी आदि मौजूद रहे। संवाद