रोजगार की दुहाई देकर पहाड़ से पलायन करने वाले युवाओं के लिए पौड़ी निवासी निखिल रौथाण और मुकेश बछेती किसी प्रेरणास्रोत से कम नहीं हैं। देश-विदेश के होटलों में अपनी सेवाएं देकर लौटे ये युवो गढ़वाली व्यंजनों को स्वरोजगार का जरिया बनाने के साथ-साथ इन्हें अलग पहचान देनेे का प्रयास कर रहे हैं।
पौड़ी के न्यू आदर्श विहार कालोनी निवासी निखिल रौथाण कुरुक्षेत्र से होटल मैनेजमेंट करने के बाद एमबीए और एमएचएम (मास्टर ऑफ होटल मैनेजमेंट) कर चुके हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद निखिल रौथाण दिल्ली, नोएडा, जयपुर आदि बड़े शहरों में होटल व्यवसाय से जुड़े रहे। 26 वर्षीय रोबिन का कहना है कि पहाड़ में स्वरोजगार की काफी संभावनाएं हैं। इसको देखते हुए उन्होंने और विदेश में होटल प्रबंधन के अनुभव प्राप्त कोटद्वार निवासी मुकेश बछेती ने रोजगार के लिए बाहर जाने के बजाय पौड़ी में गढ़वाली व्यंजनों को स्वरोजगार का जरिया बनाया।
दोनों समूह बनाकर पार्टी और अन्य कार्यक्रमों के लिए गढ़वाली व्यंजन तैयार कर रहे हैं। पिछले पांच महीने से दोनों एक निजी संस्थान में होटल मैनेजमेंट की शिक्षा देने साथ-साथ लोगों को चैंसा, फाणू, कोदे की रोटी, रोट, अर्से, मीठा भात समेत कई गढ़वाली व्यंजनों के दुर्लभ स्वाद की याद को हकीकत में बदल रहे हैं।
कोटद्वार निवासी मुकेश बछेती ने बताया कि गढ़वाली व्यंजनों की डिमांड बढ़ रही है। इस कार्य में उनके साथ अन्य बेरोजगारों को भी रोजगार मिल रहा है।