श्रीनगर। मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल का इमरजेंसी विभाग जूनियर डॉक्टरों के भरोसे संचालित हो रहा है। इससे मरीजों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रात के समय इमरजेंसी में आने वाले मरीजों व तीमारदारों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है।
अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले कई मरीजों को रेफर होने के लिए विवश होना पड़ता है। रात को इमरजेंसी में आने वाले मरीज इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि इमरजेंसी में अस्पताल प्रशासन को जूनियर, सीनियर रेजिडेंट के अलावा विशेषज्ञ डॉक्टरों की ड्यूटी भी लगानी चाहिए। इमरजेंसी विभाग में जो ड्यूटी चार्ट लगाया जाता है उसमें किसी भी सीनियर डॉक्टर या विशेषज्ञ डॉक्टर का नाम अंकित नहीं रहता है।
वहीं मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने कहा कि जिले के सीएमओ और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अस्पतालों में डॉक्टर और उपकरणों की पूर्ण व्यवस्था की गई है। एक भी मरीज हायर सेंटर के लिए रेफर नहीं होने चाहिए। अस्पताल की इमरजेंसी में एक्सपर्ट डॉक्टर 24 घंटे तैनात रहने चाहिए।
बेस अस्पताल की इमरजेंसी में जूनियर के अलावा सीनियर डॉक्टर व विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुुविधा मरीजों को दी जा रही है, जिससे सीनियर डॉक्टर की ओपीडी रहती है। उसी दिन उसकी इमरजेंसी ड्यूटी भी रहती है। इस बात को इमरजेंसी के ड्यूटी चार्ट में भी अंकित कराया जाएगा।
डाॅ. सीएमएस रावत, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल।