उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यूकेएसएसएससी प्रकरण में गिरफ्त में आए हाकम सिंह जैसे कई हाकम हैं। इस मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा ने विधानसभा भर्ती प्रकरण का मामला उछाला है। प्रदेश सरकार को नियुक्तियों का आधार स्पष्ट कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही भर्ती प्रकरण में लिप्त अन्य लोगों के नामों का भी खुलासा करना चाहिए।
शुक्रवार को श्रीनगर में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कहा कि विधान सभा में हुई नियुक्तियों के मामले में विधान सभा अध्यक्ष ने जो कदम उठाया है उस पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। मगर जो नियुक्तियां गलत पाई गई हैं उनमें किस स्तर की गलतियां हुई हैं इसकी जानकारी लोगों के संज्ञान में आना जरूरी है। नियुक्तियों को रद्द करने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। यदि नियुक्तियां रद्द करने का आधार केवल तदर्थ नियुक्ति है तो प्रदेश में बड़ी संख्या में तदर्थ नियुक्तियां हुई हैं। कुछ लोगों को बचाने के लिए नियुक्तियों को रद्द किया गया है।
उन्होंने कहा कि गैरसैंण के नाम पर दो बार नियुक्तियां की गईं लेकिन आज गैरसैंण में एक भी कर्मचारी नहीं है। रावत ने कहा कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर महिलाओं के 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण, राज्य आंदोलनकारियों के 10 फीसदी आरक्षण के मसले का समाधान किया जाना चाहिए। जिन भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया गया है उनमें आवेदन करने वाले कई अभ्यर्थी निर्धारित आयु सीमा पार कर चुके हैं। उनके बारे में भी विचार हो।