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डाक्टर ही नहीं, टेक्नीशियन भी कम

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पौड़ी। डाक्टरों की कमी तो जगजाहिर है ही। पौड़ी में तो एक्सरे तकनीशियन समेत विभिन्न तकनीकी कर्मियों के तीस फीसदी पद खाली हैं। ऐसे में अस्पतालों एक्सरे मशीनें और प्रयोगशालाएं होने के बावजूद लोगों को भटकटना पड़ रहा है।
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पौड़ी जिले के ग्रामीण अंचलों में 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रयोगशालाएं हैं। इनमें रक्त, यूरीन, मल, कफ इत्यादि की जांच के लिए उपकरण भी हैं। प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ की कमी से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोखड़ा, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थलीसैण, घंडियाल और नैनीडांडा की लैब शोपीश बनी हुई हैं। लोगों को जांच के लिए पौड़ी या कोटद्वार जाना पड़ रहा है।
कमोबेश यही हाल अस्पतालों में लगी एक्सरे मशीनों का भी है। जनपद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबौ को छोड़कर थलीसैण, घंडियाल, नैनीडांडा और बीरोंखाल में एक्सरे मशीनें तकनीशियनों की कमी के कारण शोपीश बनी हैं। विभाग में डेंटर हाइजिनिस्ट, नेत्र सहायक और डार्करू म सहायक व अन्य तकनीकी कर्मियों के पद खाली होने से भी लोगों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
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पौड़ी जिले में तकनीकी कर्मियों का ब्योरा
पद रिक्त संख्या
-प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ 4
-एक्सरे तकनीशियन 4
-डेंटल हाईजिनिस्ट 4
-डार्क रूम सहायक 4
-नेत्र सहायक 5
-डीएचईओ 1
-एचईओ 17
कोट-
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोखड़ा में लैब तकनीशियन नहीं हैं। प्रयोगशाला में ताला लगा है। मशीनें जंग खा रही है। रक्त सैंपलों की जांच के लिए लोगों को कोटद्वार जाना पड़ रहा है। -पुष्कर जोशी समाजिक कार्यकर्ता पोखड़ा
जिले में तकनीशियन पद रिक्त होने से कई अस्पतालों एक्सरे मशीनों और प्रयोगशालाओं का उपयोग नहीं हो पा रहा है। बाहर जाना लोगों की मजबूरी है। समस्या शासन के संज्ञान में है।-डा. एके सिंह मुख्य चिकित्साधिकारी पौड़ी गढ़वाल



एक साल से धूल फांक रही सीटी स्कैन मशीन
‘एईआरबी’ मुंबई से नहीं मिली एनओसी
- मशीन संचालन के लिए रेडियालॉजिस्ट और तकनीशियन भी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
पौड़ी। जिला अस्पताल में करीब ढाई करोड़ की लागत से लगी सीटी स्कैन मशीन एक साल से बंद कमरे में धूल फांक रही है। इस मशीन को चलाने के लिए अस्पताल प्रशासन को भाभा एटोमिक एनर्जी रिसर्च सेंटर ‘एईआरबी’ मुंबई से एनओसी नहीं मिल पाई है। शासन से इसे संचालित करने के लिए अस्पताल में रेडियोलोजिस्ट और तकनीशियन भी तैनात नहीं किया गया है।
लोगों की मांग को देखते हुए शासन ने पिछले साल अक्तूबर माह में जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन लगाई थी। इस मशीन को लगाने में करीब ढाई करोड़ का खर्चा आया है, लेकिन अब तक इसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। सीटी स्कैन मशीन होने के बाद भी यहां के मरीजों को सीटी स्कैन के लिए बाहर भटकना पड़ रहा है।
कोट-
भाभा एटोमिक एनर्जी रिर्सच सेंटर मुंबई से इसे संचालित करने के लिए एनओसी नहीं मिल पाई है। एनओसी लेने के लिए पिछले माह फिर पत्र भेजा गया है। मशीन को संचालित करने के लिए अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट और तकनीशियन भी नहीं है।- डा.एससी पंत प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल पौड़ी
सीटी स्कैन मशीन लगाने में ढाई करोड़ खर्च होने के बाद इसका उपयोग न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। स्वास्थ्य विभाग को इसके गंभीरता से लेना चाहिए। -धर्मवीर रावत पूर्व सभासद पौड़ी
सीटी स्कैन मशीन का संचालित न होना प्रशासन के उदासीन रवैये को दर्शा रहा है। शासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ढाई करोड़ की मशीन का धूल फांकना अच्छी बात नहीं है। - विमल कुमार बहुगुणा निवासी धनक गांव विकास खंड पौड़ी
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