कोटद्वार। नगर पालिका क्षेत्र की गैराज रोड पर चंदा खान का घर दीपावली के लिए सज चुका है। रंग बिरंगी लड़ियां लगी हैं। छोटी दिवाली (आज) गेट को फूलों से सजाया जाएगा। धनतेरस पर शगुन के लिए बर्तन भी खरीदे। बड़ी दीपावली के दिन घर की छत पर लगाए तुलसी के पौधे को जलते दियों से सजाया जाएगा और लक्ष्मी की पूजा के बाद प्रसाद वितरण होगा। कोटद्वार का यह मुस्लिम परिवार दशकों से इस्लाम धर्म को मानने के साथ हिंदू धर्म के तीज और त्योहार भी पूरी श्रद्धा से मनाता है। इस घर में कुरान के कलमा के साथ गीता के श्लोक भी पढ़े जाते हैं। रमजान में रोजे तो नवरात्र में व्रत रखे जाते हैं।
दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल के फेमली क्वार्टर में मोहम्मद रफी के घर जन्मी चंदा खान को मायके से ही इस तरह के संस्कार मिले। उनकी शादी वर्ष 1962 में गैराज मार्ग कोटद्वार निवासी यूसुफ खान के साथ हुई। चंदा खान ने मायके की तरह ससुराल में हिंदू तीज त्योहारों को मनाने की ठानी। जब उन्होंने यहां इसकी शुरूआत की तो मुस्लिम समुदाय के लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। आखिर चंदा खान की जिद के आगे उनके पति के साथ समुदाय के लोगाें को भी झुकना पड़ा। युसूफ खान का कई वर्ष पहले इंतकाल हो गया। 69 वर्षीय चंदा खान की दो बेटी और दो बेटे हैं। मां से मिले संस्कारों को वह भी सौहार्द के साथ पूरा कर रहे हैं।
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बच्चे भी मां के नक्शेकदम पर
चंदा की शादी के दो वर्ष बाद मीनू का जन्म हुआ। बचपन से मां ने मीनू को मस्जिद के साथ मंदिर जाने की आदत डालवाई। मीनू खान सभासद रह चुकी और वर्तमान में एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। मीनू नवरात्र में नौ दिन व्रत रखती हैं। वैष्णो देवी की यात्रा कर चुकी हैं। बड़ा बेटा अकबर खान साइकिल से बदरीनाथ तक की यात्रा कर चुके हैं। तीसरी बेटी रेनू खान कुरान और गीता दोनों पढ़ती है। वह कलियर शरीफ, अजमेर शरीफ में चादर पोशी करती है तो चंडी देवी के दर्शन भी। छोटा बेटा इब्राहिम खान रमजान में रोजे रखते हैं और सावन में भोले नाथ की पूजां। वह चारधाम और अमरनाथ यात्रा कर चुके हैं।
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संस्था कर चुकी है सम्मानित
उनके सर्वधर्मसंभाव के जीवन से प्रेरित होकर गिरधारी लाल आर्य महर्षि दयानंद संस्था ने उन्हें पांच अक्तूबर को ‘गिरधारी लाल आर्य जनसरोकार सम्मान 2014’ से सम्मानित किया गया है।