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ओड़िसी नृत्य की प्रस्तुति ने नौनिहालों में भरा कौतुहल

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पौड़ी। स्पीक मैके की ओर से जीआईसी खिर्सू व मरखोड़ा में ओडिसी नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य विधा की प्रस्तुति को देख छात्र-छात्राएं सम्मोहित नजर आए। छात्र-छात्राओं ने नृत्यांगना से नृत्य की बारीकियां सीखने के साथ-साथ सवाल-जवाब भी किए।
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मंगलवार को जीआईसी खिर्सू व मरखोड़ा में प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना अभय लक्ष्मी बालकृष्णन ने शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। नृत्यांगना ने चौका त्रिभंगी और पल्लवी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी। छात्र-छात्राओं को नृत्य का अभ्यास कराने के बाद नृत्यांगना ने बताया कि ओडिसी नृत्य ने शिल्प रुप से जन्म लिया है। उड़ीसा राज्य के मंदिरों में शिल्प मूर्तियों से यह दूसरी शताब्दी में शुरू हुआ है। उन्होंने बताया कि गुरु केलूचरण महापात्रा, गुरु पंकजचरण दास, गुरु देवा प्रसाद ने इस शास्त्रीय नृत्य को शिल्पकला से परिलक्षित किया है। अभय लक्ष्मी ने बताया कि ओडिसी नृत्य में मूलरूप से भगवान जगन्नाथ व श्रीकृष्ण की आराधना नृत्य शैली में की जाती है। नृत्यांगना अभय लक्ष्मी पेशे से इंजीनियर हैं। कार्यक्रम में स्पीक मैके के सदस्य परवेज अहमद ने बताया कि शास्त्रीय संगीत व लोक कलाओं को विश्वभर में पहुंचाने के लिए आईआईटी दिल्ली के प्रो. किरन सेठ ने वर्ष 1977 में स्पीक मैके का गठन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रवेश चमोली, महेश गिरी व कविता खत्री ने किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य जगपाल सिंह चौहान, एसपी सिंह, बबीता भूषण, दुर्गेश बत्र्वाल, देवेंद्र रावत, रेखा संगवान, अरुण नौटियाल, जेपी डिमरी, दुर्गेश शर्मा, सुशील डंडरियाल, ऊषा पुरी, केडी सेमवाल आदि मौजूद थे।
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