पौड़ी। फसलों के साथ फल, सब्जियां और मसाले भी उगाकर पर्वतीय किसान अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं। कृषि और औद्यानिकी उत्पादों की एक साथ पैदावार होने से जमीन की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी।
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार में उत्तराखंड के पर्वतीय कृषकों की आय दोगुना करने के लिए बागवानी तकनीकों का महत्व एवं रणनीति विषय पर आयोजित गोष्ठी में उद्यान विशेषज्ञों ने यह बात कही। संयुक्त निदेशक (उद्यान) डॉ. रतन कुमार ने कहा कि बागवानी को अपनाकर किसान सात गुना तक आय बढ़ा सकते हैं। मुख्य उद्यान अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में छोटे खेत, लागत में बढ़ोतरी, सिंचाई सुविधाओं की कमी, खेतों का ढालनुमा और मृदा उर्वरता में कमी जैसे कारणों से कृषि फसलों की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। ऐसे में पर्वतीय कृषि को लाभकारी बनाने के लिए इसका औद्यानिकी में समावेश करना जरूरी है। गोष्ठी में जिले के 146 किसानों ने हिस्सा लिया। गोष्ठी में भरसार विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. बीपी नौटियाल, सहायक उद्यान अधिकारी पीएस रतूड़ी, कार्यक्रम समन्वयक अंशुमान सिंह, डॉ. होशियार ङ्क्षसह, रणबीर सिंह, टीका प्रसाद उनियाल आदि शामिल रहे।