पौड़ी। गढ़वाल लोकसभा सीट से उत्तराखंड क्रांति दल के प्रत्याशी शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि उनकी पार्टी पहाड़ के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। राष्ट्रीय दलों ने हमेशा पहाड़ से खिलवाड़ किया है। उन्होंने कहा कि उक्रांद जनता के बीच क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर जा रही है और जनता इस बार भाजपा-कांग्रेस को सबक सिखाने के लिए तैयार है।
शुक्रवार को चुनाव प्रचार के बाद उक्रांद के गढ़वाल लोकसभा प्रत्याशी शांति प्रसाद भट्ट ने पत्रकारवार्ता की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पलायन, बेरोजगारी, वीरान होते गांव, बर्बाद होती खेती, परिसंपत्ति व स्थायी राजधानी मुख्य मुद्दे हैं, लेकिन भाजपा-कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में जनता को उलझाने और जुमलेबाजी करने में लगी हुई है। भट्ट ने कहा कि भारत के 12 हिमालयी राज्यों का केंद्र में अलग पर्वतीय विकास विभाग बनाया जाना चाहिए। उक्रांद को जनता का आशीर्वाद मिला तो संसद में इसके लिए पुरजोर आवाज उठाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के शराब को लेकर लगाव का नतीजा है कि प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड के ड्राई क्षेत्रों (जिन धार्मिक स्थलों में शराब पूर्ण बंधित थी) में भी शराब परोसने का काम किया है। देवभूमि को शराब मुक्त बनाए जाने के लिए मातृशक्ति ने आंदोलन किया। प्रदेश सरकार इसी मातृशक्ति को मुकदमों की बेड़ियों में जकड़कर अपमानित करने का कार्य कर रही है। भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड वनसंपदा से भरा है, लेकिन प्रदेश का वन विभाग घाटे में चल रहा है, जो चौंकाने वाली बात है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा प्रदेश में बिजली व पानी के लिए कर चुकाना पड़ता है। उक्रांद हमेशा से उत्तराखंड के लिए ग्रीन बोनस दिए जाने की मांग करता आ रहा है। नौजवान बेरोजगार घूम रहे हैं। पहाड़ में खेती बर्बाद होती जा रही है, लेकिन भाजपा-कांग्रेस को इससे कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की स्थायी राजधानी गैरसैंण व राज्य भाषा के लिए संसद में आवाज उठाई जाएगी।