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प्रत्येक नारी है अपराजिता, आवश्यकता है स्वयं को पहचान देने की

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श्रीनगर। अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स महाअभियान के तहत आयोजित गोष्ठी में महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान कमांडेंट (मेडिकल) डा. ममता अग्रवाल ने कहा कि कई महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उलझकर तो कई काम के बोझ के कारण अपने स्वास्थ्य पर जरा भी ध्यान नहीं देती और यह उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने कहा कि सशक्त बनने के लिए महिलाओं का स्वस्थ रहना भी बेहद जरूरी है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि महिला सशक्त होगी तो परिवार व समाज भी सशक्त होगा।
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अपराजिता महाभियान के तहत एसएसबी के केंद्रीयकृत प्रशिक्षण संस्थान में संदीक्षा सदस्यों व महिला प्रशिक्षुओं के साथ स्वास्थ्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान कमांडेंट (मेडिकल) डा. ममता अग्रवाल ने संदीक्षा सदस्यों व प्रशिक्षु महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी टिप्स दिए। कहा कि महिलाओं को अपने खानपान विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कार्यक्रम में 100 से अधिक महिलाओं ने प्रतिभाग किया। एसएसबी केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र के कलाकेंद्र में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक नारी अपराजिता है। बस केवल स्वयं को पहचान देने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संदीक्षा अध्यक्षा रुचि बलोदी ने कहा कि मां बच्चे की पहली शिक्षक होती है। शिक्षित व सशक्त महिला एक संस्कारित परिवार की नींव रखती है। महिला सशक्त होगी तो परिवार भी सशक्त होगा। सशक्त परिवार से ही सशक्त समाज का निर्माण होता है। कार्यक्रम में डीआईजी उपेंद्र प्रकाश बलोदी, कमांडेंट नागेंद्र रौतेला, द्वितीय कमान अधिकारी सुरेंद्र विक्रम, डा. विनय अग्रवाल, आदि मौजूद थे।
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इस तरह के अभियान के आज जरूरत है, जो महिलाओं में जागरूकता लाएं। अमर उजाला ने यह एक अच्छी पहल की है।

रुचि बलोदी, अध्यक्षा संदीक्षा।
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- सबके स्वास्थ्य का ध्यान रखती है महिलाएं, लेकिन अपना नहीं। महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना आवश्यक है।
कविता शर्मा।

महिला सशक्तिकरण की पहल हमें किसी ओर से नहीं, खुद से करनी होगी। बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना, उनका पूरा सहयोग करके अपना योगदान दे सकते हैं।
ऋचा श्रीवास्तव।

मेरा अपना अनुभव है कि हमारे अपने परिवारों में ही लड़के और लड़कियों को अलग-अलग तरह से देखा गया। हमें महिला सशक्तिकरण की पहल घर से ही शुरू करनी होगी।
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अमिता सिंह।

- महिला को कमजोर समझने की सोच गलत है। महिलाओं का इतिहास गौरवमयी रहा है। हमें इस सोच को बदलना होगा।
सौम्या दीक्षित।
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