पौड़ी। गोविंद बल्लभ पंत इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी घुड़दौड़ी के प्राचार्य डा. सत्य प्रकाश पांडे के त्यागपत्र ने एक और बहस को जन्म दे दिया है। इससे पहले कालेज के प्राचार्य डा. एमएल देवल और डा. वाईके सिंह को कालेज में वित्तीय अनियमितताओं के बाद त्यागपत्र देना पड़ा था। कालेज एक बार फिर जांच के दायरे में है और ऐसे में वर्तमान प्राचार्य ने भी त्यागपत्र शासन को भेजा है। इससे कालेज एक बार फिर सुर्खियों में है।
वर्ष 2013 में जीबी पंत इंजीनियरिंग कालेज के प्राचार्य डा. एमएस देवल की शिकायतों के बाद सचिव के निर्देश पर जांच आरंभ हुई। जांच में सामने आया कि देवल की नियुक्ति में तमाम कायदों को ताक पर रखा गया। देवल के कार्यकाल में तत्कालीन कुल सचिव जीके अवस्थी की नियुक्ति भी फर्जी करार दी गई। इसके अलावा बायो टेक्निकल विभाग के प्रो. नकली सिंह की नियुक्ति, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट अधिकारी अशोक कुमार, अनुसूचित जाति के पदों पर सामान्य की नियुक्ति, प्लाट क्रय में घोटाले, साफ्टवेयर घोटाला, कंप्यूटर क्रय समेत अन्य मामलों में घोटाले सामने आए। लिहाजा डा. देवल की कालेज से विदाई हो गई। इसके बाद वर्ष 2016 में कालेज के प्राचार्य का पदभार डा. वाईके सिंह ने संभाला, लेकिन डा. वाईके सिंह पर भी अनियमितताओं के आरोप लगे और अपर सचिव, उत्तराखंड पंकज कुमार पांडे की जांच में दोष सिद्ध होने के बाद उन्हें भी कालेज से विदा होना पड़ा।
वर्तमान प्राचार्य डा. सत्य प्रकाश पांडे ने अगस्त 2016 में कालेज के जिम्मेदारी संभाली, लेकिन उनके एक साल के कार्यकाल में ही कालेज में प्रेक्षागृह मरम्मत व कैंटीन टेंडरिंग समेत अन्य मामलों में कालेज एक बार फिर विवादों में आ गया है। इस बीच कालेज के संयुक्त कर्मचारी संघ के अध्यक्ष भरत सिंह नेगी ने सूचना अधिकार के जरिए कुल सचिव संदीप कुमार की डिग्रियों पर सवाल उठा दिया और तमाम डिग्रियां फर्जी करार दे दी। इसके अलावा कालेज के 200 आउटसोर्स कर्मचारी धरने पर डट गए। आरोप लगाया कि उनके पीएफ का पैसा ही आउटसोर्स ठेकेदार हड़प गया। ऐसे में प्राचार्य डा. सत्य प्रकाश पांडे ने त्यागपत्र दे दिया है। हालांकि उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे रहे हैं।
कोट
जीबी पंत कालेज पर अनियमितताओं के आरोप की एसआईटी जांच की संस्तुति की गई है। इसके अलावा प्रशासनिक जांच भी जारी है। इंजीनियरिंग के इस उच्च संस्थान में किसी भी तरह की अनियमितताएं छात्रों को प्रभावित करती हैं, इसलिए इसकी कड़ी जांच के साथ ही दोषियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।
-सुशील कुमार, जिलाधिकारी पौड़ी।