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हिमाचल की देवीनंदन पदयात्रा देवप्रयाग पहुंची

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देवप्रयाग। हिमाचल व उत्तराखंड में प्राचीन काल से धार्मिक सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। इसकी साक्षी देव यात्राएं हैं, जो आज भी जीवित हैं। इन्हीं यात्राओं में हिमाचल के देवरी खनेटी से चलने वाली देवीनंदन पदयात्रा भी है। इस देवयात्रा में श्रद्धालु बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा पर निकल चुके हैं। हिमाचल से करीब 600 किलोमीटर की यात्रा कर पदयात्री देवप्रयाग पहुंचे। यात्री लगभग साढ़े तीन माह की यात्रा में 2000 किलोमीटर पैदल चलकर वापस हिमाचल लौट जाएंगे।
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यात्रा में शामिल रामानंद शर्मा ने बताया कि देवी के आदेश के बाद यह पदयात्रा हिमाचल से चलती है। देवी को आराध्य मानने वाले कोटखाई क्षेत्र के करीब 40 गांवों के प्रतिनिधि इस पदयात्रा में शामिल होते हैं।
लगभग 20 वर्ष पूर्व देवी की यह पदयात्रा देवप्रयाग तीर्थ होते हुए बदरी केदार पहुंची थी। इस बार 35 श्रद्धालुुओं का जत्था देवी की डोली और निशानों के साथ निकला है। हिमाचल के पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों की थाप के साथ यह पदयात्रा 21 मार्च को हिमाचल के खनेटी से निकली थी, जो कोटखाई, कोकु, नाला, गुमा व छैला होते शिमला पहुंची। यहां से सोलन, चंडीगढ़, यमुनानगर, सहारनपुर, रुड़की, हरिद्वार व ऋषिकेश होते देवप्रयाग पहुंची।
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यात्रा में शामिल नरेंद्र, मदन, दिनेश, विशाल व सचिन ने बताया कि देवी यात्रा में शामिल यात्रियों को सात्विक आचार विचार अपनाना पड़ता है। देवी किसी वाहन में सवार होकर नहीं चलती। वह हमेशा पदयात्रा कर बदरी केदार दर्शन को जाती है। वहीं, देवप्रयाग में संगम पर गंगा स्नान के बाद देवी डोली प्राचीन श्री रघुनाथ मंदिर पहुंची, जहां पदयात्रियों ने भगवान की पूजा अर्चना की।
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