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सुभारती मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए व्यवस्था जुटाना मुश्किल

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श्रीनगर। संसाधनों की कमी झेल रहे राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में यदि सुभारती मेडिकल कॉलेज देहरादून के 100 छात्र-छात्राओं को भेजा जाता है, तो संस्थान के लिए व्यवस्था बनाना मुश्किल हो जाएगा। यहां न तो पर्याप्त संसाधन है और ना ही संकाय सदस्य (फैकल्टी)। खास बात यह है कि उक्त कमियों के चलते श्रीनगर मेडिकल कॉलेज की मान्यता खुद खतरे में है। ऐसे में सुभारती मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं के लिए संसाधन कहां से जुटाए जाएंगे?
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विगत 23 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सुभारती मेडिकल कॉलेज के 300 छात्र-छात्राओं को उत्तराखंड के सरकारी/गैर सरकारी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के निर्देेश पर श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में सुभारती के प्रथम व द्वितीय वर्ष के 100 छात्र-छात्राएं शिफ्ट किए जाने का निर्णय लिया गया था। मालूम हो कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में प्रतिवर्ष एमबीबीएस की 100 सीट निर्धारित हैं। नए छात्र आने पर संस्थान को प्रथम व द्वितीय वर्ष में 50-50 छात्रों की जरूरतों के मुताबिक व्यवस्था करनी होगी, जबकि संस्थान में पर्याप्त हॉस्टल नहीं है। स्थिति यह है कि क्लीनिकल एकेडमिक बिल्डिंग मेें प्रशिक्षु डॉक्टर रह रहे हैं। चार साल पूर्व 250 की क्षमता के लेक्चर थियेटर का उद्घाटन हुआ था, आज तक यहां फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो पाई। संकाय सदस्यों के लगभग 50 फीसदी पद रिक्त चल रहे हैं।
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-व्यवस्थाएं जुटायी जाएंगी। इंटर्न हॉस्टल बन गया है। सिर्फ फर्नीचर लगाया जाना है। लेक्चर थियेटर में फर्नीचर की व्यवस्था की जानी है।
- प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर
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