पौड़ी। शहर की 26 हजार और ग्रामीण क्षेत्रों की 30 हजार जनसंख्या के लिए श्रीनगर से पेयजल सप्लाई होती है। श्रीनगर में इन दिनों शुद्ध पेयजल की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है। बता दें कि श्रीनगर और पौड़ी में एक ही पंप हाउस से सप्लाई होती है। इससे साफ है कि पौड़ी में भी वही पानी पहुंच रहा है जो श्रीनगर के लोग पी रहे हैं। ऐसे में पौड़ी के लोग भी अब शुद्ध पेयजल की मांग को लेकर मुट्ठियां भींचने लगे हैं।
पौड़ी शहर में 1985 में बनी पेयजल लाइन से पानी की सप्लाई हो रही है। शहर में 26 किमी पेयजल लाइन शहर की नालियों के समानांतर है। पाइप लाइन के सूराखों से सीवर व नालियों का गंदा पानी सीधे पेयजल लाइन में समा रहा है, जो घरों तक पहुंचता है। यही नहीं कंडोलिया, लक्ष्मीनारायण, क्यूंकालेश्वर, हनुमान मंदिर व नागदेव कुल नौ पेयजल टैंकों की सुरक्षा व सफाई की व्यवस्था भी लचर है। करीब एक महीने पहले लक्ष्मीनारायण स्रोत पर पेंट के डब्बे व ब्रश धोने से घरों में रंगीन पानी पहुंचने से पता चला कि लोग दूषित पानी पी रहे हैं। शिकायत पर विभाग ने लोगों को स्रोत के पास से सोखता पीट हटाने के नोटिस थमा दिए और लोगों को हिदायत दी कि वहां कपड़े, बर्तन व नहाए नहीं।
दूषित जलापूर्ति के मामले में शहरवासियों में बेहद गुस्सा है। उनका साफ तौर पर कहना है कि उनकी मजबूरी है कि वह गंदे पानी को पीने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। दलवीर सिंह नेगी, अनूप देवरानी व देवानंद नौटियाल ने कहा कि शुद्ध पेयजल सबकी जरूरत है। जल संस्थान की जिम्मेदारी है कि वह शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाए, पर ऐसा नहीं हो रहा है।
श्रीनगर से पानी फिल्टर होकर पहुंच रहा है। इसकी शुद्धता की भी लगातार जांच की जा रही है। टैंकों की सफाई वर्ष में दो बार होती है। पुरानी लाइन होने से इसमें जंग व छेद होने की संभावना है। इससे गंदा पानी लाइन के अंदर जा सकता है। विभाग की कोशिश है कि हर घर को शुद्ध पेयजल मुहैया करवाया जाए। - एसके गुप्ता, अधिशासी अभियंता जल संस्थान पौड़ी।
बच्चों में क्रिमी, टायफाइड, डायरिया, वायरल फीवर, ज्वर, पीलिया जैसे घातक रोग दूषित पेयजल से होते हैं। इसके अलावा महिलाएं व बुजुर्ग भी इससे पीड़ित है। एक माह में छह सौ के आसपास ऐसे मरीज आए हैं जिन्हें दूषित पानी पीने से रोग अपनी गिरफ्त में ले रहा है।
- डा. विनोद कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ