पौड़ी। जीबी पंत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी घुड़दौडी में डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग कार्यशाला के दूसरे दिन उपग्रह इमेजिंग, सैन्य अभियान, उपग्रह सर्विलांस सेवा, बायोमैट्रिक व फेस डिटेक्शन आदि प्रणालियों पर विशेषज्ञों ने विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में उभर कर सामने आया कि जल्द ही दुनिया पूर्ण रूप से सेटेलाइट सिस्टम पर आश्रित हो जाएगी।
डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग पर आयोजित कार्यशाला में एनआईटी श्रीनगर के डा. नितिन कुमार ने बायोमैट्रिक व फेस डिटेक्शन प्रणाली पर वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली सरकारी, गैरसरकारी व फॉरेंसिक क्षेत्रों में कारगर साबित हो रही है। चेहरों की पहचान और विविधता एक बड़ा कारगर हथियार है, इससे शातिर अपराधी भी नहीं बच सकते। आईईटी लखनऊ के डा. केवी आर्य ने इमेज डाटा सुरक्षा की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल सैन्य अभियानों, उपग्रह इमेजिंग, सर्विलांस सेवाओं में किया जा रहा है। कार्यशाला में डा. आशीष नेगी, डा. एसएस भदौरिया, डा. एमके पांडा, डा. यशवंत सिंह चौहान, डा. भोला झा, डा. ममता बौंठियाल, डा. एमपीएस चौहान, जोगेंद्र, सिद्धार्थ, पपेंद्र कुमार, दीपक डंगवाल, अभिषेक गुप्ता व वीएम ठक्कर आदि मौजूद रहे।