पौड़ी। हेनब गढ़वाल विवि के मानव विज्ञान विभाग व श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभा यात्रा समिति की ओर से ‘हिमालय में जल संकट’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने हिमालय की तलहटी में घटते भू-जल स्तर को चिंतनीय बताया। कहा कि मिश्रित वन इस समस्या का समाधान है।
बृहस्पतिवार को मुख्यालय के क्यूं कालेश्वर स्थित मां झालीमाली आश्रम में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हिमालय की तलहटी में भारत के अनेक राज्य बसे हैं, जिनमें उत्तराखंड का भौगोलिक, सामरिक व आर्थिक महत्व किसी से छिपा नहीं है। गांववासी ने कहा कि हिमालय की तलहटी में तेजी से भू-जल स्तर में गिरावट देखी जा रही है। इसके पीछे जंगलों की आग, सीमित होते मिश्रित वन, उदासीन मानव प्रवृत्ति मुख्य कारक हैं। कहा कि हिमालय में जल संकट की समस्या का मूल समाधान मिश्रित वन हैं, जिसे बढ़ाने के लिए पांच अगस्त से अभियान शुरू किया जाएगा, जो सेम-मुखेम नागराजा धाम डांडा टिहरी से शुरू होगा। इस मौके पर मानव विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. वीएस चौहान, पर्वतीय विकास एवं शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोड़ा, डा. एचएम भट्ट, अनिरुद्ध कुमार, डा. जेपी भट्ट व मनीष चंद्र आदि मौजूद थे।