पौड़ी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी विश्वविद्यालय भरसार के डा. अंशुमान सिंह को यंग साइंटिस्ट 2017 व बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान नई दिल्ली में द सोसाइटी ऑफ ट्रापिकल एग्रीकल्चर के अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में दिया गया।
द सोसाइटी ऑफ ट्रापिकल एग्रीकल्चर नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस 16 व 17 दिसंबर को नई दिल्ली में आयोजित की। कांफ्रेंस में देश में बढ़ रहे प्रदूषण का फसलों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव पर वैज्ञानिक वार्ता हुई। कई देशों से आए वैज्ञानिकों ने कृषि की नवीनतम तकनीकों को भारतीय कृषि वैज्ञानिकों के साथ साझा किया।
कांफ्रेंस में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डा. अंशुमान सिंह ने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रतिभाग किया। डा. अंशुमान सिंह ने उत्तराखंड की जलवायु तथा यहां की कृषि एवं उद्यान तथा फसलों के बारे में जानकारी दी। कांफ्रेंस में डा. अंशुमान सिंह ने बताया कि यदि पर्वतीय अंचल में संरक्षित खेती (पॉलीहाउस तकनीक) के अंतर्गत बे-मौसमी सब्जियों का वैज्ञानिक उत्पादन पूरे वर्ष किया जाए तो कृषकों की आय में वृद्धि की जा सकती है। कांफ्रेंस में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सेवानिवृत्त एडीजी डा. केके जिंदल ने डा. अंशुमान सिंह को युवा वैज्ञानिक पुरस्कार 2017 देकर सम्मानित किया। इसी कार्यक्रम में उन्हें उत्तम शोध पत्र प्रस्तुत करने पर पुरस्कार भी दिया गया।