पौड़ी। गढ़वाल मंडल में करोड़ों की वन भूमि पर धड़ल्ले से अवैध कब्जों का सिलसिला जारी है। संरक्षित और आरक्षित दोनों ही वन क्षेत्रों में 1226 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जे हैं। हैरानी की बात यह है कि वन भूमि पर इतने अधिक कब्जों के बावजूद वन विभाग के किसी अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय नहीं हुई। मुख्य वन संरक्षक भुवन चंद्र ने कहा कि डीएफओ स्तर से इन मामलों में कार्रवाई की जा रही है।
प्रदेश में राज्य गठन के बाद से वन भूमि पर अवैध कब्जों का सिलसिला बढ़ा है। बद्रीनाथ वन प्रभाग, मसूरी वन प्रभाग, शिवालिक वृत्त के देहरादून वन प्रभाग, हरिद्वार वन प्रभाग, उत्तरकाशी व टिहरी वन प्रभाग की भूमि पर सबसे अधिक अतिक्रमण हुआ है। मुख्य वन संरक्षक भुवन चंद्र के मुताबिक वन भूमि पर कुछ कब्जे राज्य गठन से पहले के हैं तो कुछ राज्य गठन के बाद के। स्टाफ की लापरवाही और मिलीभगत से ये कब्जे हुए हैं। कुछ मामलों में लोगों को लीज पर भूमि दी गई जो उन्होंने खाली नहीं की। मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि जहां कही भी अवैध कब्जे हुए हैं, संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि अब डीएफओ स्तर से इन मामलों में कार्रवाई की जा रही है।