पौड़ी। धुमाकोट बस हादसे के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों को बगैर अनुमति मुख्यालय न छोड़ने के आदेश दिए गए हैं। इक्का दुक्का नहीं बल्कि कई बार इस तरह के आदेश किए जा चुके हैं, लेकिन गढ़वाल कमिश्नर शैलेश बगौली और पौड़ी के जिलाधिकारी सुशील कुमार के इन आदेशों के बावजूद शुक्रवार को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। विकास भवन स्थित उरेडा (उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) के दफ्तर में एक महिला चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को छोड़कर पूरा स्टाफ गायब मिला।
मंडल मुख्यालय पौड़ी में पहले से अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा दफ्तरों में न बैठने की शिकायते आती रही हैं। धुमाकोट बस हादसे के दिन भी जनपद एवं मंडल के कई अधिकारी और कर्मचारी मंडल मुख्याल से बाहर थे। जिसके बाद न सिर्फ गढ़वाल कमिश्नर बल्कि जिलाधिकारी सुशील कुमार की ओर से हर बैठकों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुख्यालय न छोड़ने के आदेश दिए गए। डीएम ने तो अपने आदेश में यहां तक कहा है कि छुट्टी वाले दिन भी अधिकारी मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे, लेकिन शुक्रवार दोपहर दो बजे विकास भवन स्थित उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण कार्यालय का नजारा देखने लायक था। दफ्तर की चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दीपा रावत को छोड़कर दफ्तर में कोई मौजूद नहीं थे। दफ्तर के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि दफ्तर में कुल छह लोगों का स्टाफ है। जिसमें वरिष्ठ परियोजना अधिकारी अजय कुमार गुप्ता की ओर से कार्यालय में एक प्रार्थना पत्र छोड़ा हुआ है। जिसमें कहा गया है कि दो से 13 जुलाई तक अर्जित अवकाश स्वीकृति के लिए उन्होंने उरेडा मुख्यालय में प्रार्थना पत्र भेजा था, लेकिन अब तक अवकाश स्वीकृति पत्र नहीं मिला। अवकाश स्वीकृति के इंतजार में वे मुख्यालय छोड़ रहे हैं। दफ्तर की तकनीकी सहायक बीना करासी की ओर से भी दफ्तर में एक प्रार्थना पत्र दिया गया। इसमें उनकी ओर से कहा गया कि 14 और 15 जुलाई को राजकीय अवकाश उपभोग के लिए उन्हें जिला मुख्यालय से बाहर जाना है। उन्हें 13 जुलाई दोपहर को स्टेशन छोड़ने की अनुमति दें। दफ्तर की कनिष्ठ सहायक पूजा यादव ने भी अपने प्रार्थना पत्र में कुछ यही लिखा है। उन्होंने कहा कि 14 और 15 जुलाई को राजकीय अवकाश उपभोग के लिए उन्हें ऋषिकेश जाना है। वही दफ्तर में अनुसेवक सत्येंद्र सिंह रावत ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि 11 जुलाई को उनका स्वाथ्य अचानक खराब हो गया। उन्हें 11 से 12 जुलाई तक अवकाश दिया जाए, लेकिन वे 13 जुुलाई को भी दफ्तर में नहीं थे न ही उनकी ओर से इसके लिए कोई प्रार्थना पत्र दिया गया था। अवर अभियंता संदीप कुमार भी कार्यालय में नहीं मिले न ही उनकी ओर से अवकाश के लिए कोई प्रार्थना पत्र दिया गया था।
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ऐसे चलता है छुट्टी का खेल
कर्मचारी, अधिकारी कई बार बगैर अनुमति के मुख्यालय से गायब रहते हैं उनकी ओर से बचाव में दफ्तर में प्रार्थना पत्र छोड़ दिया जाता है। यदि किसी अधिकारी ने औचक निरीक्षण किया तो यह प्रार्थना पत्र काम आता है नहीं तो बाद में इसे फाड़कर रजिस्ट्रर में उस दिन की उपस्थिति दर्ज कर कर दी जाती है।
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मैं छुट्टी पर हूं अन्य कर्मचारी ऑफिस में होने चाहिए। मुझसे किसी अन्य कर्मचारी ने छुट्टी नहीं ली कोई भी छुट्टी पर नहीं है।-अजय कुमार गुप्ता वरिष्ठ परियोजना अधिकारी उरेड़ा।