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लड़की देखने आना था, तिरंगे में लिपटा शव पहुंचा घर-compat

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पाबौ। विकासखंड पाबौ के कालों गांव निवासी एवं 11 गोरखा राइफल्स में तैनात मनमोहन सिंह भंडारी (24 वर्ष) की उनके परिजन जल्द शादी करना चाहते थे। वे लड़की देखने घर आने वाले थे, लेकिन रविवार को जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया। कालो घाट पर उनका सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। मनमोहन सिंह की शुक्रवार को इज्जतनगर रेलवे वर्कशॉप के पास काठगोदाम-लखनऊ एक्सप्रेस से गिरकर मौत हो गई थी।
मनमोहन के चाचा रमेश भंडारी के मुताबिक राजकीय इंटरमीडिएट कालेज कालों से इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद मनमोहन सेना में भर्ती हो गए थे। इन दिनों उनकी रेजीमेंट देहरादून में है। करीब दस दिन पहले ही उन्हें देहरादून से बरेली भेजा गया था। बताया गया है कि वह विभागीय कार्य से दून लौट रहे थे। इसा बीच यह हादसा हो गया। बड़े भाई का शव घर पहुंचने पर उनकी छोटी बहन सुनीता और छोटे भाई नरेंद्र सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। मनमोहन के चाचा रमेश भंडारी ने बताया कि मनमोहन की दोनों बहनों कुसुम और सुनीता की शादी हो चुकी है, जबकि छोटा भाई नरेंद्र सिंह दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। मनमोहन के पिता भगत सिंह भंडारी भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। वह इन दिनों दिल्ली में प्राइवेट जॉब करते हैं। मनमोहन के चाचा ने बताया कि परिजन उनकी शादी के लिए लड़की देख रहे थे। उन्हें भी लड़की देखने घर आना था।
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पूरे क्षेत्र में शोक की लहर
मनमोहन का शव रविवार सुबह कालों गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। कालों, वज्वाड़, माथोली व पाबौ आदि क्षेत्रों से उसकी अंतिम विदाई में जनसैलाब उमड़ पड़ा। लैंसडौन से आए सेना के जवानों ने सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी।
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रेलवे की लापरवाही है तो हो कार्रवाई
ग्राम प्रधान कालो सुनीला देवी व मनमोहन के चाचा रमेश भंडारी ने कहा कि इस घटना में यदि रेलवे विभाग की लापरवाही सामने आती है तो विभाग के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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