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अध्यक्ष और सभासदों की खींचतान में विकास पर ब्रेक

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पौड़ी। नगर पालिका के वजूद में आने के बाद पहली बार 12 सितंबर को पालिका अध्यक्ष बेनाम के वित्तीय अधिकार सीज हुए हैं। इसे कुछ सभासद अपनी जीत करार दे रहे हैं। हालांकि बेनाम कहते हैं कि अगले हफ्ते वे मुख्यमंत्री व शहरी विकास मंत्री से मुलाकात कर वित्तीय हक वापस मांगेंगे। फिलहाल, वित्तीय अधिकार छिन जाने से शहर की तमाम विकास योजनाएं सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं।
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मंडल मुख्यालय पौड़ी की नगर पालिका राजनीतिक तौर पर प्रदेश में विशेष महत्व रखती है। इसकी एक वजह यह भी है कि पौड़ी से पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी, डा. रमेश पोखरियाल निशंक, वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, कदावर सतपाल महाराज समेत अन्य नेता सीधे तालुक रखते हैं। वर्ष 2018 की शुरुआत में पालिका के चुनाव होने हैं और जब पालिका तेजी से पटरी पर दौड़ रही थी तब वित्तीय अधिकारी सीज हो गए। पौड़ी में कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। वर्तमान में कूड़ा निस्तारण पालिका रात को करती है। बेनाम ने मांडाखाल में जमीन तो तलाशी, लेकिन वह एनजीटी के दायरे में आ गई। पालिका श्रीनगर विधानसभा के विधायक डा. धन सिंह रावत से भी जमीन की गुहार लगा चुकी लेकिन समस्या का अंत फिर भी नहीं हुआ। मात्र यही नहीं बल्कि अस्पताल के पास पार्किंग, नया बस अड्डा, पालिका का नया निर्माणाधीन भवन भी अधर में है।
पालिका के 11 सभासदों में से विनोद बिष्ट, नीलम रावत, अरविंद व जितेंद्र जोशी बेनाम को सीधे तौर पर पालिका बोर्ड के खिलाफ करार दें रहे हैं। उनका कहना है कि बेनाम ने ग्रीष्मोत्सव व शरदोत्सव में करोड़ों का वारा-न्यारा किया है। वे साफ तौर पर बेनाम के इस्तीफेे की भी मांग कर रहे हैं हालांकि बेनाम इसे राजनीति से प्रेरित करार देते हुए सभासदों को विकास में रोड़ा बता रहे हैं।
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कोट
वित्तीय अधिकार सीज हुए हैं ये सही है लेकिन उनके द्वारा कोई वित्तीय अनियमितता नहीं की गई है। इस संबंध में वे अगले हफ्ते मुख्यमंत्री व शहरी विकास मंत्री से मुलाकात करेंगे।
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यशपाल बेनाम, नगर पालिका अध्यक्ष पौड़ी।
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