रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी के पहाड़ों के दुर्गम स्थानों पर फंसे लोग शाम ढलते ही मौत के खौफ से कांप उठते हैं। घने बादल उन्हें मौत के साये की तरह नजर आ रहे हैं।
हर रात बारिश होती है और यह तय नहीं रहता कि अगली सुबह उनमें से कौन देख पाएगा। लोग लाशों पर चल रहे हैं। जो बीमार पड़ गया, वह मर जा रहा है। सारे यात्री भूखे, प्यासे हैं।
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हालात बहुत बुरे हैं
यह खौफनाक हालात केदारनाथ, ऊखीमठ और दूसरी जगहों से हेलीकाप्टर से बचाकर लाए गए लोगों ने बताए हैं। दून अस्पताल के डाक्टरों की टीम भी मौके पर पहुंची है।
तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
टीम का कहना है कि हालात बहुत बुरे हैं। चारों तरफ लाशें फैली हैं। लोग लाशों पर चलकर आ जा रहे हैं। जो भी यात्री बीमार पड़ा, वह फिर मर ही गया।
कुदरत के कहर के बाद बचाव की कोशिश
भूख और प्यास ने लोगों की हालत बुरी कर दी है। दून अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा.आरएस असवाल का कहना है कि टीम जो दवाएं बताती है, प्रतिदिन हेलीकाप्टर से भेजी जा रही हैं।
शाम ढलते ही बैठने लगता है दिल
जोलीग्रांट एयरपोर्ट लाए गए सुशील, सागर, आशुतोष ने बताया कि रात को पहाड़ पर मौत का मंजर हो जाता है। बारिश के साथ ठंड तेज हो जाती है और लोग ठिठुर कर मर जाते हैं।
तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। हाथ-पैर ऐंठ जाते हैं। दिन में यह उम्मीद रहती है कि बचाव के लिए कोई आएगा।
शाम ढले दिल बैठने लगता है कि अगली सुबह देख पाएंगे कि नहीं। उनका कहना है कि मौत के चंगुल में फंसे सारे लोग भूखे हैं। बिस्कुट के पैकेट के लिए लोग लड़ रहे हैं।