पॉवर कॉरपोरेशन आफ ट्रांसमिशन लिमिटेड (पिटकुल)अफसरों ने बिना काम के ही कंपनी को 1.70 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। पिटकुल प्रबंधन ने जांच रिपोर्ट में अनियमितता पकड़ी है। पिटकुल अध्यक्ष एवं प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. उमाकांत पंवार ने भी प्रबंधन की रिपोर्ट को सही ठहराया है।
पिटकुल की श्रीनगर-काशीपुर के बीच हाइटेंशन लाइन लगाने की योजना में यह घपला सामने आया है। वर्ष 2006 में योजना के टेंडर हुए। लाइन बिछाने से पहले फारेस्ट क्लीयरेंस और रूट सर्वे का कार्य होना था। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2012 में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता विकास शर्मा ने बिना कार्य पूरा किए फारेस्ट क्लीयरेंस के 35 लाख रुपये भुगतान करा दिए।
गड़बड़ी मिलने पर जब टेंडर का काम दूसरी कंपनी को दिया तो पता लगा कि पिछली कंपनी द्वारा किए गए रूट सर्वे के हिसाब से हाईटेंशन लाइन बिछाना संभव नहीं है। जबकि रूट सर्वे के कार्य के एवज में भी पिटकुल अफसर विकास शर्मा ने 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान करा दिया।
गूगल मैप के आधार पर बना दिया रूट सर्वे
आरोप है कि पुरानी कंपनी ने महज गूगल मैप के आधार पर रूट सर्वे बना दिया। प्रबंधन की जांच रिपोर्ट पर शर्मा ने पिटकुल अध्यक्ष के समक्ष अपील दायर की थी। पिटकुल अध्यक्ष ने शर्मा के खिलाफ दी गई प्रबंधन की जांच रिपोर्ट को सही माना है।
उधर, प्रबंध निदेशक एसएस यादव का कहना है कि गड़बड़ी पकड़ में आने पर कंपनी से 35 लाख रुपये ब्याज सहित वसूले लिए हैं। गलत रूट सर्वे के लिए जारी हुए 1.35 करोड़ रुपये की भी रिकवरी होगी।
फिलहाल शर्मा को अधीक्षण अभियंता से अधिशासी अभियंता पर रिवर्ट कर दिया गया है। रूट सर्वे के भुगतान की रिकवरी और आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। आरोपी अफसर शर्मा का कहना है कि आरोप सही नहीं है और इससे ज्यादा वह कुछ टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं।