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Nainital News: अवैध तमंचा बरामदगी मामले में युवक दोषमुक्त

Thu, 23 Jul 2026 12:57 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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नैनीताल। बेतालघाट थाना क्षेत्र में अवैध तमंचा बरामदगी के मामले में न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए तल्लाकोट निवासी दीपक सिंह जलाल को दोषमुक्त कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट/प्रथम अपर सिविल जज (जूडि) नैनीताल उर्वशी रावत की अदालत ने पुलिस विवेचना में पाई गई गंभीर त्रुटियों और साक्ष्यों में विरोधाभास को आधार बनाते हुए अभियुक्त को संदेह का लाभ दिया।
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अभियोजन के अनुसार, 27 नवंबर 2024 को बेतालघाट थाना पुलिस शांति व्यवस्था एवं संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान घिरोली पुल के पास दीपक सिंह जलाल के कब्जे से 315 बोर का एक अवैध तमंचा बरामद होने का दावा किया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस टीम के थाने से रवाना होने संबंधी सामान्य डायरी (जीडी) की प्रविष्टि प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे पुलिस की मौके पर उपस्थिति पर संदेह उत्पन्न हुआ। इसके अलावा, पुलिस ने बरामदगी का समय शाम 5:45 बजे बताया, जबकि न्यायालय में प्रस्तुत वीडियो में स्पष्ट रूप से रात्रि जैसा अंधेरा दिखाई दे रहा था। घटना एक व्यस्त सार्वजनिक मार्ग पर होने के बावजूद पुलिस ने किसी स्वतंत्र स्थानीय व्यक्ति को बरामदगी का गवाह नहीं बनाया। इसके साथ ही बरामद तमंचे की कार्यक्षमता सिद्ध करने के लिए किसी प्रकार की बैलिस्टिक या एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) जांच रिपोर्ट भी प्रस्तुत नहीं की। इन सभी तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। अदालत ने दीपक सिंह जलाल को आरोप से दोषमुक्त करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
अभियोजन के अनुसार, 27 नवंबर 2024 को बेतालघाट थाना पुलिस शांति व्यवस्था एवं संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान घिरोली पुल के पास दीपक सिंह जलाल के कब्जे से 315 बोर का एक अवैध तमंचा बरामद होने का दावा किया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस टीम के थाने से रवाना होने संबंधी सामान्य डायरी (जीडी) की प्रविष्टि प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे पुलिस की मौके पर उपस्थिति पर संदेह उत्पन्न हुआ। इसके अलावा, पुलिस ने बरामदगी का समय शाम 5:45 बजे बताया, जबकि न्यायालय में प्रस्तुत वीडियो में स्पष्ट रूप से रात्रि जैसा अंधेरा दिखाई दे रहा था। घटना एक व्यस्त सार्वजनिक मार्ग पर होने के बावजूद पुलिस ने किसी स्वतंत्र स्थानीय व्यक्ति को बरामदगी का गवाह नहीं बनाया। इसके साथ ही बरामद तमंचे की कार्यक्षमता सिद्ध करने के लिए किसी प्रकार की बैलिस्टिक या एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) जांच रिपोर्ट भी प्रस्तुत नहीं की। इन सभी तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। अदालत ने दीपक सिंह जलाल को आरोप से दोषमुक्त करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
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