मतीन के कांग्रेस में शामिल होने के बाद लगे बैनर
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सियासत में कोई परंपरागत दुश्मन या दोस्त नहीं होता। 23 वर्षों तक कांग्रेस की नाक में दम करने वाले अब्दुल मतीन सिद्दीकी आज कांग्रेस के दोस्त बन गए। चुनाव में चुनौती बनने वाले मतीन को साधकर वित्त मंत्री ने सभी विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया।
हल्द्वानी विधानसभा सीट पर लगभग 25 हजार मुस्लिम मतदाता है। 2007 में भाजपा से बंशीधर भगत को 39,248 और कांग्रेस से डा. इंदिरा हृदयेश को 35,013 वोट मिले थे। जबकि समाजवादी पार्टी से अब्दुल मतीन सिद्दीकी को 18,967 और निर्दलीय मोहन पाठक को 10,361 वोट मिले थे।
मतीन के खड़े होने से मुस्लिम वोट कांग्रेस और सपा में बंट गए थे। वोटों के बंटवारे ने डा. हृदयेश की राह रोक दी थी। डा. हृदयेश लगभग चार हजार वोटों से हार गई थीं। राजनीतिक पंडितों की मानें तो वित्त मंत्री की सहमति के बाद कांग्रेस के प्रदेश सह प्रभारी संजय कपूर, टीडीसी के पूर्व चेयरमैन मिक्की कपूर को मतीन को मैनेज करने का जिम्मा सौंपा गया था।
कांग्रेस में आने को लेकर मतीन पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश के संपर्क में थे। डा. हृदयेश ने मंगलवार को सभी संशय पर विराम लगाते हुए मतीन को कांग्रेस में शामिल करा दिया।
माना जा रहा है कि मतीन के कांग्रेस में आने से मुस्लिम वोटों का बंटवारा नहीं होगा और डा. हृदयेश को इसका फायदा मिल सकता है। सवाल ये उठता है कि कांग्रेसी मतीन को धुर विरोधी के रूप में देखते आए हैं। कांग्रेस के उभरते अल्पसंख्यक नेता क्या मतीन से तालमेल बैठा पाएंगे।