नैनीताल के डीएसबी कैंपस से एमए की पढ़ाई कर रही मुस्लिम युवती शहनाज की योग के प्रति अलग नजरिया रखने वाले मुस्लिमों से अपील है कि योग को धार्मिक नजरिये से तौलना बंद करें। योग जो एक बेहतरीन जीवन शैली और स्वास्थ्य का माध्यम है, उसे अपनाएं और इसका भरपूर लाभ उठाएं। शहनाज कहती हैं, कि माई नेम इज शहनाज एंड आई लव योगा।
शहनाज का कहना है कि योग के साथ मैं ओम का उच्चारण भी करती हूं और गायत्री मंत्र का जाप भी करती हूं। इससे मुझे मानसिक शांति मिलती है। शहनाज का यहां तक कहना है कि नमाज भी तो वज्रासन की मुद्रा समेत कई आसनों में की जाती है। फिर योग से मुस्लिमों को परहेज क्यों हो?
शहनाज बताती हैं कि उन्होंने तीन माह तक शांति कुंज हरिद्वार में रहकर प्राण चिकित्सा का प्रशिक्षण लिया और इस दौरान हवन, आरतियों तथा गायत्री मंत्र जाप में भाग लिया। अभी भी वह गायत्री मंत्र और ओम का जाप करती हैं। शहनाज ने बताया कि काशीपुर में अध्ययन के दौरान उनका रुझान योग की ओर हुआ और जल्द ही वह इसमें पारंगत हो गईं। तब से अनेक जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पुरस्कार मिलने से हौसला बढ़ गया।
शहनाज ने कहा कि पिता अशफाक हुसैन शुरू में योग में ज्यादा रुचि लेने से सहमत नहीं थे, लेकिन माता मुन्नी बेगम ने शुरू से हौसलाअफजाई की और भरपूर साथ दिया। बाद में उनकी रुचि और उपलब्धि देखकर जल्द ही पिता ने भी उसे सहयोग देना शुरू कर दिया। शहनाज पहले अर्थशास्त्र से एमए करने की इच्छुक थी, लेकिन अब वह डीएसबी कैंपस नैनीताल से योग से एमए कर रही है और भविष्य में योग टीचर बनकर योग को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहती हैं।
नैनीताल। योग प्रतियोगिताओं में राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी शहनाज प्रतिभाग कर चुकी है। उसने बताया कि राज्य स्तर में रुद्रपुर में तीन बार, हल्द्वानी, काशीपुर तथा राष्ट्रीय स्तर में चौधरी रणवीर सिंह विश्वविद्यालय जींद (हरियाणा) में डीएसबी कॉलेज की टीम से प्रतिभाग किया है और अनेक पुरस्कार प्राप्त किए हैं।