ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का असर कुछ जगहों पर दिखाई पड़ा। परिवहन निगम की बसें, फैक्ट्रियों से लेकर अधिकांश बैंक बंद रहे। इसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि करीब चार बजे के बाद बसों का संचालन शुरू हो गया।
ट्रेड यूनियन की हड़ताल का सबसे ज्यादा और सीधा असर बसों पर पड़ा। रोडवेज बस अड्डे से करीब सवा सौ आने-जाने वाली बसों का संचालन होता है। हड़ताल के चलते ही सुबह से बस अड्डे पर सन्नाटा था। कर्मचारी काम पर नहीं पहुंचे।
हल्द्वानी बस अड्डे से चलने वाली नैनीताल रीजन, यूपी की मिलाकर करीब सवा सौ बसों का संचालन होता है, जिसके कारण करीब तीन हजार तक यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रोडवेज के अलावा फैक्ट्री पर भी असर रहा।
गणेश कत्था फैक्ट्री बंद रही। इसके अलावा मेडिकल रिप्रजेंटेटिव ने भी काम नहीं किया। टेंपो संचालन पर भी आंशिक असर पड़ा। अध्यक्ष केदार पड़लिया ने कहा कि बंद को समर्थन दिया गया था। 11 बजे के बाद टेंपो का संचालन शुरू हुआ।
केमू अध्यक्ष सुरेश डसीला ने बताया कि संचालन पर असर नहीं पड़ा। व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित नहीं हुई। इससे पूर्व ट्रेड यूनियंस संगठन बस अड्डे पर एकत्र हुए। यहां से नारेबाजी और मार्च करते हुए प्रदर्शनकारी बुद्ध पार्क तक पहुंचे और जुलूस एक सभा में तब्दील हो गई।
एक्टू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजा बहुगुणा ने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता पर आने के बाद श्रमिकों पर हमले की घटना बढ़ी। बैंक, बीमा समेत हर जगह के लिए सौ प्रतिशत निवेश का रास्ता खोल दिया गया है।
सीटू प्रदेश अध्यक्ष सत्यप्रकाश ने कहा कि आक्रामक तरीके से जनविरोधी नीतियों को लागू किया जा रहा है। काला धन समेत दूसरे वायदे छलावा साबित हुए हैं। बीमा यूनियन के मनोज गुप्ता, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद महेंद्र सिंह जीना ने कहा कि सड़क सुरक्षा अधिनियम के तहत काला कानून सरकार ने पेश किया है।
इस दौरान जेएस रौतेला, पीएस खाती, पीपी आर्या, मुकेश पंत, केएन पांडे, बहादुर सिंह जंगी, राजेंद्र कुमार, रिंकी जोशी, दीपा उप्रेती, शांति शर्मा ने भी संबोधित किया। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने भी बंद को समर्थन दिया।