अखंड सौभाग्य का व्रत वट सावित्री शनिवार को मनाया गया। अमावस्या होने और शनि जयंती एक साथ होने से शानदार योग रहा। भरणी नक्षत्र, एवं सौभाग्य योग बनने, चतुष्करण योग के सानिध्य में इस अमावस्या का विशेष महत्व है। ज्योतिष त्रिभुवन उप्रेती ने बताया इस दिन मेष राशि में चंद्रमा का संचार हो रहा है। ज्योतिष डॉ.मंजू जोशी ने बताया वट सावित्री पर्व पर महालक्ष्मी, बुधादित्य और सौभाग्य योग निर्माण हो रहा है।
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शहर के मंदिरों में भीड़ रही और वट वृक्ष के नीचे बैठकर 16 श्रृंगार में सज धज कर पहुंची सुहागिनों ने सावित्री-सत्यवान और यमराज की पूजा की। वृक्ष में रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद मांगा। वृक्ष की सात बार परिक्रमा की।माता सावित्री को अर्पित किया हुआ श्रृंगार व भेंट इत्यादि दान किया। बाद में जरूरतमंदों को सामर्थानुसार दान किया।