रामनगर (नैनीताल)। कॉर्बेट में बाघों की बढ़ती संख्या से मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा नहीं आए, इसके लिए वन विभाग ग्रामीणों को बाघों से मित्रता करना सिखाया जाएगा। वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को प्रशिक्षण देने की तैयारी चल रही है। फरवरी से ग्रामीणों को बाघों से मित्रता को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में कॉर्बेट पार्क से सटे गांवों के ग्रामीण हिस्सा लेंगे। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व पार्क से लगे नेशनल हाईवे 309 पर गर्जिया से मोहान तक बाघ की दहशत बनी है। इस क्षेत्र में बाघ अब तक छह लोगों को निवाला बना चुका है। ग्रामीणों का रात में निकला दूभर हो गया है। वन विभाग भी लगातार मुनादी करते हुए रात में घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील कर रहा है। ग्रामीणों की दिनचर्चा प्रभावित हो गई है। अब तक की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग की किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता है। कॉर्बेट पार्क में 250 से अधिक बाघ विचरण करतेे है। इसे बाघों की राजधानी के नाम से जाना जाता है।
बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब कॉर्बेट पार्क प्रशासन ग्रामीणों को बाघों के बीच रहने का प्रशिक्षण देने पर विचार कर रहा है ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके।
ग्रामीणों को बनाएंगे बाघ मित्र कॉर्बेट टाइगर रिजर्व पार्क के निदेशक डॉ. धीरज पांडेय ने बताया कि ग्रामीणों को प्रशिक्षण देकर बाघ मित्र बनाया जाएगा। इससे बाघों के आबादी तक पहुंचने, जंगल में शिकारियों प्रवेश और जंगल का कटान रोकने में ग्रामीण मदद कर सकेंगे। बाघ मित्र जंगल से सटे गांवों में रहने वाले और शहर से जंगल की तरफ जाने वाले लोगों को बाघों से दोस्ती करना सिखाएंगे। वे लोगों को बाघ के भ्रमण वाले क्षेत्र में जाने से रोकेंगे। बाघ दिखने पर न भागने, एक जगह खड़े रहने, नीचे न झुकने और उनकी तरफ न जाने की सलाह के साथ-साथ बाघों के व्यवहार से अवगत कराएंगे।
ग्रामीणों को प्रशिक्षण देने का काम फरवरी से शुरू कर किया जा सकता है। बाघ मित्र वे ग्रामीण होंगे जो पहले से वन्यजीव और जंगल से परिचित होंगे। ऐसे अनुभवी ग्रामीणों की वन विभाग मदद ले रहा है। इन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि ये लोग आम जनता को बाघ और दूसरे वन्यजीवों के व्यवहार से अवगत करा सकें।
-डॉ. धीरज पांडेय, निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व पार्क