जंगली जानवर खेती के लिए दुश्मन साबित हो रहे हैं। उनके लगातार बढ़ते आतंक के आगे काश्तकार घुटने टेकने को मजबूर हैं। हाल ये हैं कि काश्तकार खेतीबाड़ी छोड़ मनरेगा में मजदूरी करने को मजबूर हैं।
जिले के भीमताल, रामगढ़, धारी और ओखलकांडा विकासखंड फल और सब्जी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। बेतालघाट में मिर्च का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। पिछले कुछ सालों में इन विकास खंडों में बंदरों और सूअरों का आतंक तेजी से बढ़ा है। दिन में बंदरों के झुंड और रात में सूअर फसलों को तहस-नहस कर रहे हैं। इस समस्या का समाधान न निकलने से काश्तकार खेती छोड़कर मनरेगा में मजदूरी करने को विवश हो गए हैं।
काश्तकार बताते हैं कि दो साल पहले तक बेतालघाट ब्लाक के जोशीखोला, रोपा और चापड़ गांवों में गेहूं, गहत, मास, मिर्च और धान समेत कई फसलें लहलहाती थीं। जब से बंदरों और सूअरों का आतंक शुरू हुआ है तब से खेती नुकसान का सौदा साबित होने लगी। खेती में लगातार नुकसान होता देख बेतालघाट के जोशीखोला निवासी दयाकिशन, पीतांबर, भुवन चंद्र, गोविंद बल्लभ, रोपा गांव निवासी भुवन चंद्र, रेवाधर, गोपाल दत्त और चापड़ गांव निवासी नवीन चंद्र, कुबेर सिंह ने साल भर पहले खेतीबाड़ी छोड़ दी और तभी से ये सभी काश्तकार मनरेगा के तहत मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पेट पाल रहे हैं।
बंदरों और सूअरों के आतंक के कारण इन काश्तकारों की लगभग ढाई सौ नाली जमीन पिछले एक डेढ़ साल से बंजर पड़ी हुई है। अकेले बेतालघाट ब्लाक में पिछले एक साल में मनरेगा के तहत जाबकार्ड धारकों की संख्या 6956 से बढ़कर इस साल 7136 हो गई है।
बंदरों से खेती को बचाने की कोई योजना नहीं
जंगली जानवरों के आतंक के कारण काश्तकरों के खेती छोड़ने जैसी कोई सूचना विभाग के पास नहीं है। सूअर और अन्य छोटे जानवरों से खेती को बचाने के लिए विभाग सुरक्षा दीवार बनवाता है लेकिन बंदरों से खेती को बचाने के लिए विभाग के पास अभी कोई कार्ययोजना नहीं है।
- धनपत कुमार मुख्य कृषि अधिकारी नैनीताल
मौसम आधारित न होकर नुकसान आधारित हो फसली बीमा
हल्द्वानी। जिले के पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र भेजकर फसल बीमा के नियमों में बदलाव की मांग की है।
किसान संगठन के संयोजक और भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य प्रदीप बिष्ट ने काश्तकारों की ओर से वित्त मंत्री को भेजे पत्र में पहाड़ के किसानों की समस्याओं को देखते हुए उनका समाधान कराने की मांग की है।
उन्होंने सरकार से पर्वतीय क्षेत्र में काश्तकारों को खाद, बीज और कीटनाशकों में अनुदान दिलाने, फसल बीमा के नियमों में बदलाव कर बीमा को मौसम आधारित के बजाय नुकसान आधारित कराने, हल्द्वानी में मेगा फूड पार्क स्थापित कराने, फसलों के अलावा पहाड़ में होने वाले फलों के लिए क्लस्टर बनवाने और तेलंगाना राज्य की तर्ज पर राज्य में किसान पेंशन योजना अथवा काश्तकारों को सालाना दस हजार रुपये देने का प्रावधान कराने की मांग की है।